"केला उत्पादन आधारित प्रौद्योगिकियों के माध्यम से कृषि-उद्यमिता - आत्म निर्भर भारत के लिए एक एवेन्यू" पर वर्चुअल माध्यम से क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित

15 – 17 जून, तिरुचिरापल्ली

भाकृअनुप-नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर बनाना, तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन मैनेजमेंट (मैनेज), हैदराबाद के सहयोग से "केला आधारित प्रौद्योगिकियों के माध्यम से कृषि-उद्यमिता - एक एवेन्यू" पर तीन दिवसीय वर्चुअल क्षमता विकास कार्यक्रम का आयोजन  15 से 17 जून, 2022 तक, आत्मनिर्भर भारत के तहत किया।

Virtual Capacity Development Programme on “Agri-Preneurship through Banana-based Technologies - An Avenue for Aatma Nirbhar Bharat” organized

मुख्य अतिथि, डॉ. एस. उमा, निदेशक, बनाना पर भाकृअनुप-एनआरसी, तिरुचिरापल्ली ने अपने उद्घाटन संबोधन में, उद्यमिता के अवसरों के विकास के लिए केंद्र के पास उपलब्ध विभिन्न तकनीकी से सहयोग प्राप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षुओं को केंद्र और एमएएनएजीई (MANAGE) के पास उपलब्ध विशेषज्ञता का उपयोग करके अपना खुद का उद्यम शुरू करने पर विचार करना चाहिए।

डॉ. सी. करपगम, प्रधान वैज्ञानिक (कृषि विस्तार), केला पर भाकृअनुप-एनआरसी और पाठ्यक्रम निदेशक ने कहा कि बागवानी फसलों, विशेष रूप से केला उत्पादन के विस्तार के लिए एक अलग दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इस उत्पादन दृष्टिकोण के विस्तार से मार्केट आधारित विस्तार, व्यक्तिगत विस्तार से समूह आधारित विस्तार तथा खेती प्रौद्योगिकियों विकास से निर्यात प्रौद्योगिकियों बढ़ाना एवं क्षमता विकास कार्यक्रम के लिए प्रशिक्षण को बढ़ाना और संस्थानों के अभिसरण एवं समन्वय आदि के लिए प्रतिमान बदलाव को देखा जा सकता है।

डॉ. सागर सुरेंद्र देशमुख, प्रशिक्षण सहयोगी, मैनेज, हैदराबाद ने बिजनेस स्टार्टअप को सुविधाजनक बनाने में मैनेज (MANAGE)  की भूमिका पर प्रकाश डाला।

इससे पहले, केले पर एनआरसी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ए. मोहनसुंदरम ने प्रतिभागियों को कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य से अवगत कराया।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य केले की खेती में उद्यमिता और व्यावसायिक उपक्रमों को बढ़ावा देना, तकनीकी बैकस्टॉपिंग के माध्यम से क्षमता निर्माण प्रदान करना, केले की खेती के अछूते क्षेत्रों में अभिनव व्यावसायिक समाधान की सुविधा प्रदान करना और केले के लिए भाकृअनुप-एनआरसी एवं प्रशिक्षु के बीच अनुवर्ती लिंकेज तंत्र के रूप में विकसित करना था।

कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय केले अनुसंधान केंद्र, तिरुचिरापल्ली, तमिलना)