डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने किया “जलवायु आकर्षक कृषि, वैश्विक खाद्य और आजीविका सुरक्षा के लिए मृदा और जल संसाधन प्रबंधन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन” का उद्घाटन

5 नवंबर, 2019, नई दिल्ली

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) एवं सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) ने आज राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केंद्र परिसर, नई दिल्ली में आयोजित हो रहे पाँच दिवसीय “जलवायु आकर्षक कृषि, वैश्विक खाद्य और आजीविका सुरक्षा के लिए मृदा और जल संसाधन प्रबंधन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन” का उद्घाटन किया।

Dr. Trilochan Mohapatra inaugurates “International Conference on Soil and Water Resources Management for Climate Smart Agriculture and Global Food and Livelihood Security”

वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ सॉयल एंड वाटर कंजर्वेशन, चीन और अंतरराष्ट्रीय मृदा संरक्षण संगठन (इस्को), अमेरिका के सहयोग से मृदा संरक्षण सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस सम्मेलन का आयोजन 9 नवंबर, 2019 तक किया जाएगा।

देश और पूरी दुनिया में जलवायु परिवर्तन के हालिया रुझानों पर प्रकाश डालते हुए महानिदेशक ने मृदा और जल संसाधनों के क्षरण के बारे में अपनी चिंताएँ व्यक्त की जो उत्पादक और टिकाऊ कृषि के लिए खतरा है। डॉ. महापात्र ने कहा कि लगातार बढ़ रहा तापमान वास्तव में बहुत चिंता का विषय है क्योंकि यह मानव जीवन को अत्यधिक प्रभावित करता है। उन्होंने विभिन्न मानव गतिविधियों को गंभीर जलवायु परिवर्तनों में मुख्य योगदानकर्ता माना। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए कई साधन अपनाने का आग्रह किया।

महानिदेशक ने खाद्य सुरक्षा पर जोर दिया जो न केवल देश में बल्कि दुनिया भर में भी गंभीर चिंता का विषय है। डॉ. महापात्र ने देश में खाद्य और कृषि उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए भारत सरकार की पहल के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी के लक्ष्यों को भी रेखांकित किया।

प्रो. ली रुई, अध्यक्ष, वासवाक (WASWAC), चीन ने बतौर सम्मानित अतिथि मिट्टी और जल संरक्षण के ऐसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा हेतु अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन के लिए भाकृअनुप के पहल की सराहना की। प्रो. रुई ने मिट्टी और पानी के अतिदोहन को सबसे गंभीर चिंताओं में से एक मानते हुए कहा कि इस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।

प्रो (डॉ.) सूरज भान, अध्यक्ष, सॉइल कंजर्वेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया ने इस बात पर जोर दिया कि लगातार बढ़ती आबादी के कारण प्राकृतिक संसाधनों का अतिदोहन हुआ है। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए भारत सरकार की पहलों की जानकारी दी।

डॉ. भान ने जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार की हर घर तक पाइप लाइन के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की पहल पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने देश में वर्षा जल संचयन के माध्यम से जल संरक्षण की व्यापक संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का आग्रह किया क्योंकि ये पृथ्वी के असली खजाने हैं।

डॉ. संजय अरोड़ा, संयोजक और उपाध्यक्ष, सॉइल कंजर्वेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया और प्रो. इल्डोफोन्सो प्ला सेंटिस, अध्यक्ष, आईएससीओ के साथ डॉ. समीर ए. अल-स्वाफी, समन्वयक, आईएससीओ, यू. एस. ए. भी इस अवसर मौजूद थे।

इस अवसर पर गणमान्य व्यक्तियों द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के 7 वर्ष’ और 'सम्मेलन की सार पुस्तिका' के साथ-साथ 'भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा इंडियन फार्मिंग के विशेषांक’ का विमोचन भी किया गया।

गणमान्य व्यक्तियों ने विभिन्न वैज्ञानिकों और छात्रों को शोध के संबंधित क्षेत्रों में उनके योगदान के लिए 'सॉइल कंजर्वेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (SCSI) अवार्ड्स - 2019' से भी सम्मानित किया।

पाँच दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य मृदा और जल संरक्षण के विभिन्न मुद्दों और चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना है।

सम्मेलन में चीन, जापान, स्पेन और मिस्र आदि 21 देशों के कुल 400 प्रतिनिधि भाग लेंगे।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि ज्ञान प्रबंधन निदेशालय, नई दिल्ली)