भाकृअनुप-आइआइएसआर को मिला बीजावरण संरचना (सीड कोटिंग कंपोजीशन) का एकस्व अधिकार

भाकृअनुप-भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान, कोझीकोड, केरल ने बीजावरण संरचना (सीड कोटिंग कंपोजीशन) और इसकी तैयारी के लिए एकस्व अधिकार (350698) प्राप्त किया है। संस्थान ने बीजों के लिए पीजीपीआर/लाभकारी रोगाणुओं के बीजावरण प्रौद्योगिकी का सफलतापूर्वक विकास, क्षेत्र-परीक्षण और व्यावसायीकरण किया है। डॉ. एम. आनंदराज, डॉ. वाई. के. बिनी और डॉ. ए. के. जॉनी की टीम ने इस प्रौद्योगिकी को विकसित किया है।

यह सक्रिय यौगिकों, अर्थात, पौधों के विकास के नियामकों, सूक्ष्म पोषक तत्त्वों और सूक्ष्मजीव प्रतिरक्षा सीरम (माइक्रोबियल इनोक्युलेंट्स) के वितरण में सुधार करने के उद्देश्य से बीजों की सतह पर बहिर्जात सामग्रियों का एक अनुप्रयोग है जो अंकुरण और पौधे के विकास को बढ़ा सकता है। राइजोबैक्टीरिया को बढ़ावा देने वाले पौधे के विकास का उपयोग करने वाला यह आविष्कार एवं इसकी तैयारी बीजों की व्यवहार्यता को संग्रहीत करने और एक मध्यवर्ती राज्य में लेपित जीवों को बनाए रखने में भी मदद करता है।

यह प्रक्रिया बीज की कमी को रोकती है और पर्यावरणीय तनाव से सुरक्षा सुनिश्चित करती है। यह भंडारण कीटों के खिलाफ बीज की रक्षा भी करता है, जो बदले में, बीजों की दीर्घायु को बढ़ाता है, जो कि अंकुरण को सुनिश्चित करता है और उभरते हुए बीजों को बीजों पर मौजूद जीवों की मदद से स्थापित करने में मदद करता है। आवश्यक बीज की बढ़ी हुई व्यवहार्यता मात्रा के कारण कम होता है जबकि बढ़ी हुई प्राथमिक वृद्धि के परिणामों से खरपतवार की वृद्धि कम हो जाती है।

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लाभ

यह भंडारण के दौरान व्यवहार्यता एवं बीज की गुणवत्ता को बढ़ाता है और भंडारण कीट घटना से बीजों की रक्षा करता है। बीज के अंकुरण और शक्ति को बढ़ाने के साथ-साथ, यह उपज को 15% से 30% तक सुधारने में मदद करता है। यह बीज दर की आवश्यकता को कम करने में भी सहायक है। सब्जियों सहित सभी प्रकार के बीजों के लिए उपयुक्त होने की वजह से इसका उपयोग जैविक खेती में भी किया जा सकता है।

प्रौद्योगिकी लाइसेंसिंग और व्यावसायीकरण:-

एसआरटी एग्रो साइंस प्राइवेट लिमिटेड, छत्तीसगढ़ (बायो-फर्टिलाइजर/बायो पेस्टिसाइड प्राइवेट कंपनी, जिसकी शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी) ने भी इस प्रौद्योगिकी को जनवरी, 2018 में लाइसेंस दिया था।

(भाकृअनुप-भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान, कोझीकोड, केरल)