भाकृअनुप-सीसीएआरआई, गोवा ने गोवा राज्य जैव विविधता बोर्ड, गोवा के साथ समझौता ज्ञापन पर किया हस्ताक्षर

19 फरवरी, 2021, गोवा

भाकृअनुप-केंद्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा ने आज भाकृअनुप-सीसीएआरआई की प्रौद्योगिकी ‘जायफल फली टाफी के निर्माण की प्रक्रिया’ के व्यवसायीकरण के लिए गोवा राज्य जैव विविधता बोर्ड, गोवा के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओए) पर हस्ताक्षर किया।

डॉ. ई. बी. चाकुरकर, निदेशक, भाकृअनुप-सीसीएआरआई, गोवा, और डॉ. प्रदीप सरमोकदम, सदस्य सचिव, जीएसबीबी, गोवा ने अपने संबंधित संगठनों की ओर से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।

डॉ. ई. बी. चाकुरकर ने गोवा राज्य में किसानों और कृषि उद्यमियों के लाभ के लिए संभावित प्रौद्योगिकियों के वाणिज्यिक उपयोग और हस्तांतरण की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. प्रदीप सरमोकदम ने इस बात पर जोर दिया कि जीएसबीबी राज्य के जैविक संसाधनों के सतत उपयोग के माध्यम से जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा देने व निरंतर सहयोगात्मक गतिविधियों के लिए भाकृअनुप-सीसीएआरआई के साथ काम करना चाहेगा।

ICAR-CCARI, Goa signs MoA with Goa State Biodiversity Board, Goa  ICAR-CCARI, Goa signs MoA with Goa State Biodiversity Board, Goa

जायफल में लगभग 80% से 85% फली (जायफल का बाहरी आवरण) और उच्च उपज वाली जायफल की किस्में हैं, जो प्रति पेड़ 100 किलोग्राम ताजा फली पैदा करती हैं। वर्तमान पद्धति में जायफल के बीज और जावित्री को इकट्ठा कर फली को सड़ने के लिए उसे आम तौर पर खेत में छोड़ दिया जाता है। लेकिन प्रौद्योगिकी व्यावसायिक और व्यवहार्य तरीके से मूल्य वर्धित खाद्य उत्पाद, जायफल टाफी तैयार करके फली के प्रभावी उपयोग में मदद करती है।

यह उत्पाद जायफल मसाला उत्पादों की उपज के अलावा किसानों और उद्यमियों को अतिरिक्त आय प्रदान करता है। उत्पाद बिना किसी सिंथेटिक परिरक्षकों के सरल पैकिंग के साथ लगभग 12 महीनों के लिए कमरे के तापमान पर अच्छी तरह से संग्रहीत करता है।

भाकृअनुप-सीसीएआरआई, गोवा ने प्रौद्योगिकी को पेटेंट करने के लिए पहले ही एक आवेदन (आवेदन संख्या: 201621012414) दायर किया है। संस्थान के प्रौद्योगिकी प्रबंधन इकाई ने आगे व्यावसायीकरण के लिए एमओए पर हस्ताक्षर करने में सुविधा प्रदान की।

(स्रोत: भाकृअनुप-केंद्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा)