मणिपुर के मुख्यमंत्री ने भाकृअनुप की आठ फसल किस्मों को किसानों को किया समर्पित

15 जून, 2021, इंफाल

भाकृअनुप-उत्तर पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र अनुसंधान परिसर, मणिपुर केंद्र ने मुख्यमंत्री कार्यालय, मणिपुर के सहयोग से आज ‘उत्तर पूर्व भारत की संभावित फसलें: संभावनाएँ और चुनौतियाँ तथा फसल किस्मों एवं कृषि-आदान वितरण कार्यक्रम के औपचारिक विमोचन’ पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया।

अपने उद्घाटन भाषण में, मुख्य अतिथि, श्री एन. बीरेन सिंह, मुख्यमंत्री, मणिपुर सरकार ने बदलते कृषि परिदृश्य, मांग, गुणवत्तापूर्ण भोजन, पोषण संबंधी आवश्यकता और विविधीकरण को ध्यान में रखते हुए राज्य में कृषि की प्रमुख चुनौतियों का समाधान करने पर जोर दिया।

श्री ओ. लुखोई सिंह, कृषि मंत्री, मणिपुर सरकार ने उपज वृद्धि के लक्ष्य को 20% अधिक प्राप्त करने के लिए मौजूदा 10% से 40% तक विविधता प्रतिस्थापन दर के महत्त्व पर प्रकाश डाला।

Chief Minister of Manipur dedicates Eight Crop Varieties of ICAR to the Farmers  Chief Minister of Manipur dedicates Eight Crop Varieties of ICAR to the Farmers

डॉ. सुरेश कुमार चौधरी, उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन), भाकृअनुप ने खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, स्वास्थ्य, आय सृजन और पर्यावरणीय सेवाओं में योगदान देने में कम उपयोग वाली फसलों के महत्त्व को रेखांकित किया।

श्री एम. जॉय सिंह, आई.ए.एस., आयुक्त (कृषि), मणिपुर सरकार ने राज्य के चावल उत्पादन को बढ़ाने के लिए 10 रणनीतियों और दृष्टिकोणों को लागू करने के महत्त्व को बताया।

डॉ. ए. के. त्रिपाठी, निदेशक, भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन-VII, उमियम ने सामान्य रूप से पूर्वोत्तर राज्यों और विशेष रूप से मणिपुर में उच्च उत्पादकता एवं लाभप्रदता प्राप्त करने के लिए नई प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने में केवीके की भूमिका और योगदान को रेखांकित किया।

डॉ. लक्ष्मी कांत, निदेशक, भाकृअनुप-वीपीकेएएस, अल्मोड़ा, उत्तराखंड ने कहा कि एनईएच कार्यक्रम के माध्यम से भाकृअनुप-वीपीकेएएस पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों तक पहुँचने में सक्षम है।

डॉ. वी. के. मिश्रा, निदेशक, भाकृअनुप-उत्तर पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र अनुसंधान परिसर ने उत्तर-पूर्वी भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र के महत्त्व और क्षेत्र के कृषक समुदाय के बड़े लाभ के लिए प्रौद्योगिकियों के विकास और आबादी में संस्थान के व्यवस्थित अनुसंधान और विस्तार प्रयासों पर जोर दिया।

इस अवसर के दौरान भाकृअनुप, मणिपुर केंद्र द्वारा विकसित व जारी की गई फसल किस्में इस प्रकार हैं - 3 अधिक उपज देने वाले स्टिकी चावल की किस्में (आरसी मणिफौ - 14, आरसी मणिफौ - 15 और आरसी मणिफौ - 16), 2 पेरिला किस्में (आरसी मणिथोइडिंग - 1 और आरसी मणिथोइडिंग - 2), 1 बैंगन किस्म ( आरसी मणिखामेन-1) और 2 मक्का किस्में (आरसी मणिचुजक-1 और आरसी मणिचुजक-2)।

इस अवसर पर गणमान्य व्यक्तियों ने राज्य के लगभग 1,000 किसानों को महत्त्वपूर्ण कृषि आदानों का वितरण किया।

आदानों में कृषि विभाग से गुणवत्ता वाले बीज (आरसी मणिफौ - 13), भाकृअनुप-वीपीकेएएस, अल्मोड़ा, उत्तराखंड से सोलर ड्रायर, लाइट ट्रैप और फार्म टूल्स तथा केवीके से स्प्रेयर, पोल्ट्री चिक्स और बीज शामिल थे।

अखिल भारतीय स्तर पर कुल 175 प्रतिनिधियों ने वेबशॉप में आभासी तौर पर भाग लिया।

(स्त्रोत: भाकृअनुप-उत्तर पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र अनुसंधान परिसर, मणिपुर केंद्र, इंफाल)