राजभाषा के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं में सूचनाओं/प्रौद्योगिकियों के प्रसार से कृषि क्षेत्र होगा लाभान्वित: डॉ. त्रिलोचन महापात्र

वार्षिक राजभाषा पुरस्कार वितरण समारोह - 2020 का हुआ आयोजन

26 नवंबर, 2020, नई दिल्ली

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने आज कृषि भवन, नई दिल्ली में वार्षिक राजभाषा पुरस्कार वितरण समारोह – 2020 का आयोजन किया।

राजभाषा के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं में सूचनाओं/प्रौद्योगिकियों के प्रसार से कृषि क्षेत्र होगा लाभान्वित: डॉ. त्रिलोचन महापात्र  राजभाषा के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं में सूचनाओं/प्रौद्योगिकियों के प्रसार से कृषि क्षेत्र होगा लाभान्वित: डॉ. त्रिलोचन महापात्र

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) एवं महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि परिषद अपने सभी कार्यक्रमों का संचालन हिंदी में करती है। भाकृअनुप-कृषि ज्ञान प्रबंध निदेशालय द्वारा नियमित तौर पर हिंदी प्रकाशनों – ‘खेती और फल-फूल’ - का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश भर में किसानों तक अपनी प्रौद्योगिकियों को पहुँचाने के लिए भी परिषद और परिषद के संस्थान हिंदी का ही इस्तेमाल करती है।

महानिदेशक ने कोविड-19 महामारी के दौरान भी संपूर्ण आबादी तक भोजन पहुँचाने के लिए भाकृअनुप के वैज्ञानिकों और किसानों को बधाई दी। विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, संस्थानों, अनुसंधान केंद्रों आदि के माध्यम से देश भर के कृषि क्षेत्र तथा बीज से बाजार तक किसानों को समृद्ध करने की दिशा में, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा पिछले 9 दशक से किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि विकसित प्रौद्योगिकियों तक किसानों/लाभार्थियों की पहुँच के बीच में भाषा एक पुल की तरह कार्य करती है। डॉ. महापात्र ने कहा कि परिषद हिंदी की प्रगति, उसके प्रचार-प्रसार और हिंदी में काम-काज के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया कि परिषद अपनी योजनाओं के साथ भविष्य में भी ऐसे आयोजन करता रहेगा।  

श्री संजय कुमार सिंह, अतिरिक्त सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) एवं सचिव (भा.कृ.अनु.प.) ने कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा कि हिंदी पखवाड़े में आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत करने के लिए इस कार्यक्रम की संरचना की गई है। उन्होंने बताया कि उल्लेखनीय कार्यों के साथ-साथ हिंदी के उत्थान व प्रचार-प्रसार के लिए कुल 40 प्रकार के पुरस्कार का वितरण किया जाएगा। उन्होंने हिंदी में और अधिक कार्य करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

इस अवसर पर डॉ. तिलक राज शर्मा, उप महानिदेशक, (फसल विज्ञान), भाकृअनुप; डॉ. भूपेन्द्र नाथ त्रिपाठी, उप महानिदेशक (पशु विज्ञान), भाकृअनुप; डॉ. अनिल राय, सहायक महानिदेशक, आइसीटी, भाकृअनुप भी मौजूद रहे।

राजभाषा उल्लास पखवाड़ा कार्यक्रम के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को इस अवसर पर पुरस्कृत किया गया।

राजभाषा के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं में सूचनाओं/प्रौद्योगिकियों के प्रसार से कृषि क्षेत्र होगा लाभान्वित: डॉ. त्रिलोचन महापात्र  राजभाषा के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं में सूचनाओं/प्रौद्योगिकियों के प्रसार से कृषि क्षेत्र होगा लाभान्वित: डॉ. त्रिलोचन महापात्र  राजभाषा के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं में सूचनाओं/प्रौद्योगिकियों के प्रसार से कृषि क्षेत्र होगा लाभान्वित: डॉ. त्रिलोचन महापात्र  राजभाषा के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं में सूचनाओं/प्रौद्योगिकियों के प्रसार से कृषि क्षेत्र होगा लाभान्वित: डॉ. त्रिलोचन महापात्र

श्रीमती सीमा चोपड़ा, निदेशक (राजभाषा), भाकृअनुप, ने 2019-20 की वार्षिक रिपोर्ट का ब्योरा देते हुए सितंबर माह में आयोजित राजभाषा उल्लास पखवाड़ा और विभिन्न प्रतियोगिताओं के बारे में जानकारी दी।

श्री ए. के. जगदीशन, उप निदेशक, राजभाषा, भाकृअनुप ने सभी गणमान्य अतिथियों का आभार प्रस्तुत किया।

इस कार्यक्रम में भाकृअनुप मुख्यालय सहित भाकृअनुप-संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों ने आभासी तौर पर अपनी सहभागिता दर्ज की। 

(स्त्रोत: भाकृअनुप-कृषि ज्ञान प्रबंध निदेशालय)