‘धान की सीधी बुआई का संवर्धन: कोविड-19 के दौरान संभावनाएँ और चुनौतियाँ’ पर राष्ट्रीय वेबिनार का हुआ आयोजन

12-13 जून, 2021, लुधियाना

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने 12 से 13 जून, 2021 तक ‘धान की सीधी बुआई का संवर्धन: कोविड-19 के दौरान संभावनाएँ और चुनौतियाँ’ पर एक राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया।

डॉ. त्रिलोचन महापात्र, सचिव (कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग) एवं महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) ने अपने उद्घाटन संबोधन में जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने में डीएसआर की भूमिका पर जोर दिया। राष्ट्रीय लॉकडाउन के कारण श्रमिकों की कमी के बीच 2020 के दौरान डीएसआर की सफलता पर प्रकाश डालते हुए महानिदेशक ने डीएसआर के वैश्विक परिदृश्य और इसके लाभों को रेखांकित किया। डॉ. महापात्र ने कुछ शोध योग्य मुद्दों जैसे डीएसआर अनुकूल किस्मों की तत्काल आवश्यकता, शाकनाशी सहनशीलता और प्रतिरोध आदि को भी रेखांकित किया।

National Webinar on “Promotion of Direct Seeded Rice (DSR): Prospects and Challenges during COVID-19” organized

डॉ. अशोक कुमार सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार), भाकृअनुप ने सीमित प्राकृतिक संसाधनों के साथ बढ़ती खाद्य मांग को पूरा करने में सामान्य रूप से चावल और विशेष रूप से डीएसआर के महत्त्व पर प्रकाश डाला। डीएसआर को बढ़ावा देने की दिशा में उप महानिदेशक ने सभी हितधारकों को ध्यान में रखते हुए प्रौद्योगिकी के लक्ष्यीकरण पर जोर दिया।

डॉ. सुरेश कुमार चौधरी, उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन), भाकृअनुप ने डीएसआर जैसी संसाधन संरक्षण प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया। डीडीजी के संबोधन में चावल की सीधी बुवाई से मिट्टी और पानी की आवाजाही के साथ-साथ इसके वैज्ञानिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला गया।

National Webinar on “Promotion of Direct Seeded Rice (DSR): Prospects and Challenges during COVID-19” organized

डॉ. राजबीर सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, लुधियाना, पंजाब ने डीएसआर को बढ़ावा देने के लिए संस्थान और जोन- I के कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा उठाए गए कदमों को रेखांकित किया।

वेबिनार का उद्देश्य खाद्य, पोषण एवं पर्यावरण सुरक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों (मिट्टी, पानी और पर्यावरण) के सतत उपयोग और प्रबंधन के लिए डीएसआर को बढ़ावा देने की दिशा में एक दिशा-निर्देश विकसित करना था।

वेबिनार में 2,000 से अधिक शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, राज्य सरकार के अधिकारियों, निर्माताओं, छात्रों और प्रगतिशील किसानों ने आभासी तौर पर भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, लुधियाना, पंजाब)