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मॉनीटरिंग और मूल्‍यांकन

परियोजनाओं की समीक्षा तीन स्‍तरों पर अर्थात् सलाहकार समिति, विशेषज्ञ समिति और अधिकार प्राप्‍त समिति द्वारा की जाती है। प्रत्‍येक परियोजना/कंसोरटियम के लिए एक पृथक ‘सलाहकार समिति’ बनाई जाती है। सलाहकार समिति वर्ष में एक बार परियोजना की विस्‍तार से समीक्षा और मानीटरिंग करेगी। अधिमानत: यह वर्ष के पूर्वार्द्ध में की जानी चाहिए। यदि सलाहकार समिति यह महसूस करती है कि परियोजना की मानीटरिंग एक बार से अधिक किए जाने की आवश्‍यकता है, तो समिति का अध्‍यक्ष सहायक महानिदेशक, एनएएसएफ को आगे की व्‍यवस्‍था करने के लिए कह सकता है। विशेषज्ञ समिति द्वारा परियोजना की समीक्षा वर्ष में एक बार की जाएगी। परियोजनाओं की वार्षिक समीक्षा करने के लिए एनएएसएफ द्वारा संबंधित सलाहकार समिति के अध्‍यक्ष को भी आमंत्रित किया जाए। अधिकार प्राप्‍त समिति यदि महसूस करे तो वह 5.0 करोड़ रूपये से अधिक मूल्‍य वाली परियोजनाओं की समीक्षा कर सकती है या किन्‍हीं अन्‍य परियोजनाओं की समीक्षा कर सकती है जिनकी समीक्षा करना वह महत्‍वपूर्ण समझे।