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परियोजनाओं का चयन

परियोजनाओं का चयन पूर्ण रूप से खुली प्रतियोगिता पद्धति के माध्‍यम से होगा। तथापि, यदि आवश्‍यक हो तो विस्‍तृत विचार-विमर्श और चर्चाओं के माध्‍यम से निर्धारित किए गए प्राथमिकता प्राप्‍त कार्यनीतिक क्षेत्रों या वे क्षेत्र जिनके तात्‍कालिक हल की आवश्‍यकता है, का निराकरण भी प्रायोजित पद्धति या प्रायोजित एवं स्‍पर्धात्‍मक पद्धति के संयोजन से इस निधि में से किया जाएगा। चयन दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में, समय-समय पर समाचार पत्रों में खुले विज्ञापन और भाकृअप वेबसाइट के माध्‍यम से परियोजनाओं के लिए निर्धारित प्रारूपों में संकल्‍पना टिप्‍पणियां आमंत्रित की जाएंगी। उन कार्यनीतिक विषयों जिन पर संकल्‍पना टिप्‍पणियां आमंत्रित की जाती हैं, के प्रस्‍ताव की प्रत्‍येक बोली के लिए अधिकार प्राप्‍त समितियों के विशेषज्ञों द्वारा गहन विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया जाएगा। अधिमानत: संस्‍थानों के समूह: सार्वजनिक, सीजीआईएआर, निजी या सिविल सोसायटी से कोई वैज्ञानिक या अधिमानत: वैज्ञानिकों का समूह विशेषज्ञता और संबंधित अनुसंधान के क्षेत्र में पर्याप्‍त अवसंरचना की उपलब्धि के लिहाज से विशिष्‍ट और उन्‍नत क्षमता के साथ संकल्‍पना टिप्‍पणियां प्रस्‍तुत करने का पात्र होगा। कोई भी निजी या सिविल संस्‍थान तभी उम्‍मीदवार होने का पात्र होगा जब यह पांच वर्ष से कम पुराना न हो और उसे सक्षम राज्‍य या केन्‍द्रीय प्राधिकारियों द्वारा वैज्ञानिक अनुसंधान करने के लिए पात्र संगठन के रूप में मान्‍यता दी गई हो और पंजीकृत किया गया हो, प्रस्‍तुत की जाने की प्रक्रिया पूर्ण रूप से वेब के माध्‍यम से इलेक्‍ट्रॉनिक आधारित होगी। अनुसंधान प्रस्‍ताव की रूप-रेखा वाली परियोजना संकल्‍पना टिप्‍पणी, दो-तीन पृष्‍ठों से अधिक की नहीं होगी और इसमें पृष्‍ठभूमि एवं महत्‍व, विशिष्‍ट उद्देश्‍य, एप्रोच और अस्‍थायी बजट मांग के साथ अपेक्षित कार्य निष्‍पादन शामिल होगा। प्रस्‍ताव तीन से पांच वर्ष की अवधि तक के हो सकते हैं और इनमें प्राथमिक तौर से बहु-संस्‍थागत सहयोग शामिल होना चाहिए। प्रस्‍तावित परियोजना का बजट 2 करोड़ रूपए से कम नहीं होना चाहिए और यह वास्‍तविकता के आधार पर होना चाहिए। संकल्‍पना टिप्‍पणियों की पहले सचिवालय स्‍तर पर इस आधार पर जांच की जाएगी कि क्‍या संकल्‍पना टिप्‍पणी को प्रस्‍तुत की जाने की बेसिक आवश्‍यकताएं पूरी की गयी हैं या नहीं। इसके पश्‍चात महानिदेशक भाकृअप द्वारा अनुमोदित विषय-वस्‍तु के विशेषज्ञ समितियों द्वारा जांचित संकल्‍पना टिप्‍पणी की जांच की जाएगी। विशेषज्ञ समितियों द्वारा संस्‍तुत संकल्‍पना टिप्‍पणियां निर्धारित प्रारूपों में पूर्व-प्रस्‍तावों और पूर्ण प्रस्‍तावों के रूप में तैयार की जाएंगी। सचिवालय सभी प्रस्‍तावों के विकास की प्रक्रिया में व्‍यावहारिक प्रशिक्षण मुहैया कराने का प्रयास करेगा। संबंधित विशेषज्ञ समितियां पूर्ण प्रस्‍तावों की पुन: जांच करेंगी। विशेषज्ञ समितियों को 5.0 करोड़ रूपये तक के बजट के साथ प्रस्‍ताव अनुमोदित करने के लिए प्राधिकृत किया जाएगा, परन्‍तु इन अनुमोदनों का अधिकार प्राप्‍त समिति/महानिदेशक, भाकृअप के द्वारा अनुसमर्थन किया जाएगा और अन्‍तत: स्‍वीकार किए जाएंगे। विशेषज्ञ समितियों द्वारा संस्‍तुत 5.0 करोड़ रूपये से अधिक के प्रस्‍ताव अधिकार प्राप्‍त समिति के समक्ष प्रस्‍तुत किए जाएंगे और बोर्ड द्वारा अनुमोदित किए जाएंगे। अनुमोदित और संस्‍तुत परियोजनाओं की प्रत्‍येक परियोजना के बजट को अन्तिम रूप देने के लिए लागत समिति द्वारा जांच की जाएगी। अधिकार प्राप्‍त समिति परियोजना प्रदान करने के लिए अन्‍तिम निर्णय लेगी।

विशेषज्ञ समिति/अधिकार प्राप्‍त समिति द्वारा अनुमोदित परियोजना प्रस्‍तावों के बारे में सचिवालय जहां कहीं आवश्‍यक होगा समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए जाने के पश्‍चात निर्धारित फार्मेट में स्‍वीकृति पत्र जारी करेगा। समझौता ज्ञापन में भाकृअप की आईपीआर नीति / दिशा-निर्देशों के आधार पर भागीदारों द्वारा बौद्धिक सम्‍पदा को परस्‍पर सहमति पर बांटे जाने के स्‍पष्‍ट उपबंध भी शामिल होंगे (देखें भाकृअप, 2006 : बौद्धिक सम्‍पदा प्रबंधन तथा प्रौद्योगिकी अन्‍तरण/वाणिज्‍यीकरण के लिए भाकृअप के दिशा-निर्देश)