15 अक्टूबर, 2026
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग (DA&FW) की एक पहल के रूप में, महिला किसान दिवस 2026 का आयोजन 15 अक्टूबर को देशभर के आईसीएआर संस्थानों, कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थानों (ATARIs) और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) में किया गया। इस अवसर पर भारतीय कृषि में महिला किसानों के अमूल्य योगदान को मान्यता दी गई और कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा तथा ग्रामीण आजीविका को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका को रेखांकित किया गया। यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस के साथ भी हुआ।
“विकसित कृषि और विकसित भारत के निर्माण में महिला किसानों की भूमिका” विषय ने आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों, फसल विविधीकरण, पशुधन प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण और कृषि-आधारित उद्यमों को बढ़ावा देने में महिलाओं के नेतृत्व को रेखांकित किया। समारोहों का उद्देश्य उनकी उपलब्धियों को मान्यता देना, सफल पद्धतियों को साझा करने की सुविधा प्रदान करना और विकसित भारत की दिशा में एक उत्पादक, टिकाऊ और आत्मनिर्भर कृषि क्षेत्र के निर्माण में महिलाओं की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना था।
1. भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, पश्चिम बंगाल
भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर ने अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस के साथ पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना स्थित बार्तिर बील में महिला किसान दिवस 2026 मनाया। कार्यक्रम में 30 महिला किसानों ने भाग लिया और कृषि, मत्स्य पालन तथा आर्द्रभूमि-आधारित आजीविका में उनके योगदान को रेखांकित किया गया, साथ ही टिकाऊ मत्स्य पालन और इको-एक्वा पर्यटन में अवसरों की संभावनाओं पर विचार किया गया।
डॉ. बी.के. बेहेरा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी), ने मत्स्य पालन, जलीय कृषि और आजीविका विकास में ग्रामीण महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि मछली उत्पादन, घरेलू पोषण सुरक्षा और ग्रामीण कल्याण को बढ़ाने के लिए महिला सशक्तिकरण आवश्यक है।
डॉ. प्रदीप डे, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, ने बार्तिर बील को महिलाओं के नेतृत्व वाले, विज्ञान-आधारित और पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ ग्रामीण विकास के एक मॉडल के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की। उन्होंने आजीविका में विविधता लाने, पोषण सुरक्षा मजबूत करने और महिलाओं तथा ग्रामीण युवाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार सृजित करने हेतु वैज्ञानिक मत्स्य प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, मूल्य संवर्धन और इको-एक्वा पर्यटन को एकीकृत करने पर जोर दिया। उन्होंने आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण करते हुए समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान, संस्थागत अभिसरण और सामुदायिक भागीदारी के साथ जोड़ने के महत्व को भी रेखांकित किया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण महिला किसान सम्मान था, जिसके दौरान दो मछुआरा महिलाओं, श्रीमती जयंती दत्ता और श्रीमती दुलाली रॉय को कृषि, मत्स्य पालन और ग्रामीण आजीविका विकास में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम ने वैज्ञानिक ज्ञान, उन्नत प्रौद्योगिकियों और विविध आजीविका अवसरों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने की भाकृनुप-सीआईएफआरआई की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
2. भाकृअनुप–राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, कोलकाता
भाकृअनुप–राष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, कोलकाता ने प्रौद्योगिकी, कौशल विकास और टिकाऊ आजीविका के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय महिला किसान दिवस 2026 मनाया।
डॉ. डी.बी. शाक्यवार, निदेशक, भाकृअनुप-एनआईएनएफईटी, ने कृषक महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने और प्राकृतिक रेशा-आधारित आजीविका अवसरों को मजबूत करने पर जोर दिया। कार्यक्रम में चार प्रौद्योगिकियों—कृषक महिलाओं के अनुकूल रेशा निष्कर्षक, जूट लीफ ड्रिंक, प्राकृतिक रेशा-आधारित सैनिटरी नैपकिन और युवा ज्योति—का प्रदर्शन किया गया।

सुश्री दुलाली दास, निदेशक, इछामती एफपीसी लिमिटेड, ने अपनी एफपीसी की सफलता को रेखांकित किया, जिसमें लगभग 750 सदस्य हैं, जिनमें 80% से अधिक महिलाएं हैं और जिसका वार्षिक कारोबार लगभग ₹1 करोड़ है।
कार्यक्रम में दक्षिण बंगाल की 100 कृषक महिलाओं के साथ वैज्ञानिकों और महिला विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिससे महिलाओं के नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों को मजबूत करने में तकनीकी नवाचार की भूमिका रेखांकित हुई।
3. भाकृअनुप-अनुसंधान परिसर एनईएच, उमियम, मेघालय
भाकृअनुप पूर्वोत्तर पर्वतीय (NEH) क्षेत्र अनुसंधान परिसर, उमियम ने केवीके री-भोई के सहयोग से 100 से अधिक महिला किसानों की भागीदारी के साथ राष्ट्रीय महिला किसान दिवस मनाया।
डॉ. पंकज बैसवर, प्रभारी निदेशक, ने महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता और कृषि संबंधी निर्णय लेने में भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सरकारी योजनाओं, उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों और कृषि उद्यमिता के बारे में जागरूकता पर जोर दिया। री-भोई एरिया वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष श्रीमती बालाकिन्तिएव उम्बाह ने कृषि और समाज में महिला किसानों के महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार किया।

एक संवादात्मक सत्र में गुणवत्तापूर्ण बीजों और सब्सिडी वाली कृषि मशीनरी के लिए किसानों की जरूरतों को रेखांकित किया गया। प्रगतिशील महिला किसानों को सम्मानित किया गया और प्रतिभागियों को उन्नत कृषि पद्धतियों को समर्थन देने के लिए खेत मटर की किस्म IPFD 19-3 सहित सब्जियों के बीज, जैव उर्वरक और कृषि साहित्य प्रदान किया गया।
4. भाकृअनुप-केन्द्रीय मीठाजल जीवपालन संस्थान, भुवनेश्वर
भाकृनुप-केन्द्रीय मीठाजल जीवपालन संस्थान, भुवनेश्वर ने केवीके-खोरधा के सहयोग से कौसल्यागंगा, भुवनेश्वर में 122 महिला किसानों और 82 अन्य किसानों की भागीदारी के साथ राष्ट्रीय महिला किसान दिवस मनाया। डॉ. पी.के. साहू, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफए, ने महिलाओं की आय और आजीविका बढ़ाने में वैज्ञानिक जलीय कृषि तथा बायोफ्लॉक और रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम्स (आरएएस) सहित आधुनिक प्रौद्योगिकियों की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
प्रतिभागियों ने आधुनिक जलीय कृषि प्रौद्योगिकियों, मछली पालन में ड्रोन के उपयोग और उन्नत कृषि पद्धतियों के प्रदर्शन देखे।
कार्यक्रम में बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन, किसान-वैज्ञानिक संवाद और क्षेत्रीय अनुभवों को साझा करना भी शामिल था, जिसमें महिला सशक्तिकरण, पोषण सुरक्षा और टिकाऊ ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में प्रौद्योगिकी अपनाने, कौशल विकास और क्षमता निर्माण की भूमिका पर जोर दिया गया।
5. भाकृअनुप-केन्द्रीय जूट एवं संबद्ध रेशा अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर, कोलकाता
भाकृअनुप–केन्द्रीय जूट एवं संबद्ध रेशा अनुसंधान संस्थान ने पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के चकदह ब्लॉक की 30 महिला किसानों की भागीदारी के साथ कृषक महिलाओं के लिए टिकाऊ कृषि प्रौद्योगिकियों और आजीविका अवसरों पर जनजातीय उप-योजना (टीएसपी) के तहत एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।
कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), श्रम-कठिनाई कम करने वाली प्रौद्योगिकियां, मशरूम और ड्रैगन फ्रूट की खेती, वर्मीकम्पोस्टिंग और आजीविका विविधीकरण को शामिल किया गया।

डॉ. गौरांग कर, निदेशक, भाकृअनुप-सीआरआईजेएएफ, ने कृषि में महिलाओं के लिए समान अवसर और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में उनकी भूमिका पर जोर दिया।
टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने और आजीविका के अवसर बढ़ाने में सहायता के लिए प्रतिभागियों को सब्जियों के बीज किट, बैटरी चालित स्प्रेयर, कृषि उपकरण और बंगाली भाषा में प्रशिक्षण पुस्तिका प्रदान की गई।
6. भाकृअनुप-केन्द्रीय महिला कृषि संस्थान, भुवनेश्वर
भाकृअनुप–केन्द्रीय महिला कृषि संस्थान, भुवनेश्वर ने श्री सचिन रामचंद्र जाधव, आईएएस, आयुक्त-सह-सचिव, कृषि एवं किसान सशक्तिकरण विभाग, ओडिशा सरकार, की उपस्थिति में राष्ट्रीय महिला किसान दिवस मनाया।
डॉ. मृदुला देवी, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईडब्ल्यूए, ने लैंगिक-संवेदनशील प्रौद्योगिकियों के विकास, कौशल को मजबूत करने और महिला किसानों के लिए टिकाऊ आजीविका को बढ़ावा देने में संस्थान के प्रयासों पर प्रकाश डाला। श्री जाधव ने महिलाओं के भूमि अधिकारों को मजबूत करने के लिए लैंगिक समानता, महिला सशक्तिकरण और सहयोग पर जोर दिया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण श्रम-कठिनाई कम करने तथा कार्य दक्षता और सुरक्षा में सुधार के लिए 50 महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को पैडल से संचालित, महिलाओं के अनुकूल नारियल छिलका उतारने वाले उपकरण उपलब्ध कराना था। प्रौद्योगिकी प्रदर्शन, किसान-वैज्ञानिक संवाद और छह प्रगतिशील महिला किसानों का सम्मान भी आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में 250 से अधिक महिला किसानों, विद्यार्थियों, उद्यमियों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) तथा किसान हित समूहों (एफआईजी) के सदस्यों ने भाग लिया, जिससे महिलाओं के नेतृत्व वाले कृषि विकास को मजबूत करने में लैंगिक-संवेदनशील प्रौद्योगिकियों और संस्थागत समर्थन की भूमिका रेखांकित हुई।
7. भाकृअनुप-केन्द्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद और केवीके रंगा रेड्डी
भाकृअनुप–केन्द्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद ने केवीके रंगा रेड्डी के सहयोग से भुवन रिसर्च फार्म, हयातनगर में 53 महिला किसानों की भागीदारी के साथ राष्ट्रीय महिला किसान दिवस मनाया। कार्यक्रम में कृषि उत्पादन, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा टिकाऊ ग्रामीण आजीविका में महिलाओं के योगदान को रेखांकित किया गया।

चर्चाओं में जलवायु परिवर्तनशीलता और पानी की कमी के बीच बारानी कृषि में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने और उनकी आजीविका बढ़ाने के लिए उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों, कुशल संसाधन प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, उद्यमिता और महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों पर जोर दिया गया।
8. भाकृअनुप–केन्द्रीय कंद फसल अनुसंधान संस्थान, भुवनेश्वर
भाकृअनुप–केन्द्रीय कंद फसल अनुसंधान संस्थान ने अखिल भारतीय समन्वित कंद फसल अनुसंधान परियोजना (एआईसीआरपीटीसी) के सहयोग से 15 अक्टूबर, 2026 को महिला किसान दिवस मनाया और कृषि, खाद्य सुरक्षा तथा ग्रामीण आजीविका में महिलाओं के योगदान को मान्यता दी।
डॉ. जी. सुजा, प्रभारी निदेशक, ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की और कृषि प्रौद्योगिकियों के माध्यम से महिला किसानों को सशक्त बनाने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

तिरुवनंतपुरम के उल्लूर की श्रीमती राजलक्ष्मी और अम्बूरी के एक एसएचजी का प्रतिनिधित्व करने वाली श्रीमती पारुकुट्टी कनिकन को कृषि में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
शकरकंद की खेती और लैंगिक मुख्यधारा पर तकनीकी सत्र क्रमशः डॉ. जीना मैथ्यू और डॉ. शीला इमैनुएल द्वारा आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को शकरकंद की बेलें वितरित की गईं, जिसके बाद क्षेत्र भ्रमण कराया गया।
कार्यक्रम में लगभग 150 वैज्ञानिकों, कर्मचारियों और किसानों ने भाग लिया।
9. भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र, कोडागु
भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र (कवीके), गोनीकोप्पल, कोडागु ने आज अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष (आईवाईडब्ल्यूएफ) 2026 की भावना के अनुरूप कृषि, संबद्ध क्षेत्रों, मूल्य संवर्धन और ग्रामीण उद्यमिता में महिलाओं के योगदान को मान्यता देने के लिए राष्ट्रीय महिला किसान दिवस मनाया।
कार्यक्रम में भाकृअनुप–केवीके कोडागु के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और महिला किसानों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) तथा ग्रामीण उद्यमियों के साथ संवाद किया गया। स्वागत संबोधन में कृषि, उद्यमिता और मूल्य संवर्धन में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने के महत्व को रेखांकित किया गया।
केवीके से प्रशिक्षण प्राप्त तीन सफल महिला उद्यमियों ने अपनी उद्यमशीलता यात्राएं साझा कीं और टिकाऊ आजीविका को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहित करने में वैज्ञानिक प्रशिक्षण, कौशल विकास और संस्थागत समर्थन की भूमिका पर जोर दिया।

केवीके के कर्मचारियों ने क्षमता निर्माण, उद्यम विकास, बाजार संपर्क और आजीविका संवर्धन में संस्थान की पहलों को भी प्रस्तुत किया। एक संवादात्मक सत्र ने महिला किसानों और एसएचजी सदस्यों को अनुभवों का आदान-प्रदान करने और कृषि उत्पादकता तथा घरेलू आय बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा करने का अवसर दिया।
कार्यक्रम ने वैज्ञानिक हस्तक्षेपों, कौशल विकास और उद्यमिता संवर्धन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने की आईसीएआर–केवीके कोडागु की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
10. भाकृअनुप–पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर, पटना
भाकृअनुप–पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर, पटना ने आज अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष की स्मृति में “मेरी कहानी, मेरी खेती: नवाचार, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता” विषय के तहत महिला किसान दिवस मनाया।
श्रीमती स्तुति गुप्ता, जिला परिषद की अध्यक्ष, पटना, ने महिला किसानों को आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया, जबकि डॉ. अनुप दास, निदेशक, भाकृअनुप–आरसीईआर, ने वैज्ञानिक खेती, कौशल विकास और कृषि उद्यमिता पर जोर दिया।
बिहार और झारखंड की नवाचारी महिला किसानों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया, साथ ही कृषि अनुसंधान, पत्रकारिता और संस्थागत विकास में योगदान देने वाले व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया।

पोषण वाटिकाओं और घरेलू पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए उन्नत सब्जी बीज और फलों के पौधे वितरित किए गए। किसानों ने सूक्ष्म सिंचाई, प्राकृतिक खेती एवं एकीकृत कृषि प्रणालियों सहित टिकाऊ कृषि प्रौद्योगिकियों के बारे में जानने के लिए प्रायोगिक खेतों का भी दौरा किया।
समारोह संस्थान के रांची स्थित अनुसंधान केन्द्र और बक्सर तथा रामगढ़ के केवीके में भी आयोजित किया गया। सभी स्थानों पर कुल 392 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 284 महिलाएं थीं, जिससे वैज्ञानिक हस्तक्षेपों, उद्यमिता तथा टिकाऊ आजीविका अवसरों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने के महत्व को रेखांकित किया गया।
11. भाकृअनुप–महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी
भाकृअनुप–महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी, बिहार ने आज महिला किसानों के बीच वैज्ञानिक प्रौद्योगिकियों, एकीकृत खेती और टिकाऊ आजीविका को बढ़ावा देने के लिए एक प्रशिक्षण-सह-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।
प्रगतिशील महिला किसानों ने मशरूम की खेती, प्राकृतिक खेती और मोटे अनाज-आधारित खाद्य प्रसंस्करण में अपने अनुभव साझा किए। तकनीकी सत्रों में महिला-केंद्रित कृषि प्रौद्योगिकियों, पोषण प्रबंधन, मछली पालन, बायोफ्लॉक प्रौद्योगिकी और उन्नत फसल प्रबंधन को शामिल किया गया।
प्रतिभागियों ने अजोला की खेती, वर्मीकम्पोस्टिंग, कम लागत वाली हाइड्रोपोनिक्स और एकीकृत कृषि प्रणालियों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की।

कृषि विविधीकरण और आय सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए नींबू के पौधे और सरसों के बीज वितरित किए गए। कार्यक्रम ने महिला उद्यमिता, घरेलू पोषण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में वैज्ञानिक ज्ञान, कौशल विकास और एकीकृत खेती की भूमिका को रेखांकित किया।
12. भाकृअनुप–भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, अनुसंधान केंद्र, उदगमंडलम
भाकृअनुप–भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, अनुसंधान केन्द्र, उदगमंडलम ने आज कुरुथुगुली, बसवक्कल तथा थीटुकल गांवों की लगभग 25 महिला किसानों की भागीदारी के साथ महिला किसान दिवस मनाया।
वैज्ञानिकों ने महिलाओं के अनुकूल कृषि और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन प्रौद्योगिकियों, कृषि-आधारित उद्यमिता, कृषि श्रम-कठिनाई कम करने के लिए ड्रोन तथा नीलगिरि क्षेत्र के लिए उपयुक्त कृषि वानिकी प्रणालियों पर सत्र आयोजित किए।

किसानों को पहाड़ी क्षेत्रों के अनुकूल कृषि मशीनरी, मृदा एवं जल संरक्षण पद्धतियों और जैविक तथा प्राकृतिक खेती तकनीकों से परिचित कराया गया। स्थानीय भाषा में शैक्षणिक सामग्री और संसाधन संरक्षण प्रौद्योगिकियों पर वीडियो फिल्में भी साझा की गईं।
प्रदर्शनों में मिट्टी की नमी के संरक्षण और उर्वरता सुधार के लिए कवर क्रॉप की खेती, “वेस्ट से वेल्थ” की अवधारणा के तहत चैफ कटर का उपयोग करके खरपतवार की कम्पोस्टिंग और जैविक इनपुट तैयार करना शामिल था। महिला किसानों ने सब्जी और बागान फसलों की खेती में अपने अनुभव साझा किए और पहाड़ी कृषि में वन्यजीवों के खतरे तथा श्रमिकों की कमी सहित चुनौतियों पर चर्चा की।
13. भाकृअनुप–राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, लखनऊ
भाकृअनुप–राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, लखनऊ ने आज 22 अनुसूचित जाति की महिला मछली किसानों के लिए “मत्स्य पालन में महिलाएं: वैज्ञानिक नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से आजीविका में बदलाव” विषय पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करके महिला किसान दिवस मनाया।
डॉ. काजल चक्रवर्ती, निदेशक, भाकृअनुप–एनबीएफजीआर, ने मत्स्य पालन में महिलाओं के योगदान को रेखांकित किया और आजीविका बढ़ाने के लिए नवाचारी प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
तकनीकी सत्रों तथा व्यावहारिक प्रदर्शनों में वैज्ञानिक जलीय कृषि पद्धतियां, बायोफ्लॉक प्रौद्योगिकी, कैप्टिव ब्रीडिंग, मछली रोग प्रबंधन, सजावटी मछली पालन और रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम्स (RAS) शामिल थे। प्रौद्योगिकी अपनाने और आय सृजन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य पालन संबंधी इनपुट वितरित किए गए।
अपनी सामुदायिक जलीय कृषि पहल के तहत, भाकृअनुप–एनबीएफजीआर ने 25 जनजातीय महिलाओं की सहायता के लिए तमिलनाडु सरकार के जनजातीय कल्याण विभाग के सहयोग से चेंगी अम्मन नगर, पुलिकट, तमिलनाडु में एक समुदाय-आधारित क्लाउनफिश पालन सुविधा स्थापित की।
लाभार्थियों ने 500 से अधिक सजावटी क्लाउनफिश की कटाई कर उन्हें चेन्नई स्थित एक खरीदार को बेचा, जबकि दूसरी कटाई और बिक्री चक्र से ₹1 लाख की आय हुई। यह पहल आजीविका को मजबूत करने और टिकाऊ मत्स्य विकास को बढ़ावा देने में महिलाओं के नेतृत्व वाले जलीय कृषि उद्यमों की क्षमता को रेखांकित करती है।
14. भाकृअनुप-पुष्पविज्ञान अनुसंधान निदेशालय, पुणे
भाकृअनुप-पुष्पविज्ञान अनुसंधान निदेशालय, पुणे ने महाराष्ट्र के पुणे जिले के नुरगुडी गांव में 25 से अधिक महिला प्रतिभागियों के लिए फूलों के रेजिन एनकैप्सुलेशन पर एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करके महिला किसान दिवस मनाया।
व्यावहारिक प्रशिक्षण में सजावटी वस्तुएं, स्मृति-चिह्न, की-चेन तथा पेंडेंट बनाने के लिए फूलों एवं पौध सामग्री को संरक्षित करने की तकनीकों से परिचित कराया गया।

इस पहल ने ग्रामीण महिलाओं के बीच स्वरोजगार, उद्यमिता और टिकाऊ आजीविका को बढ़ावा देने के लिए पुष्प अपशिष्ट के उपयोग, मूल्य संवर्धन और कौशल विकास की संभावनाओं को रेखांकित किया।
15. भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली
भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली ने उत्तर प्रदेश के अलीपुर, हापुड़ एवं बुलंदशहर जिलों के लगभग 220 महिला किसानों और 7 पुरुष किसानों की भागीदारी के साथ महिला किसान दिवस मनाया।
डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई, ने संपूर्ण कृषि मूल्य श्रृंखला में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया और उन्हें उन्नत प्रौद्योगिकियां, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन और टिकाऊ संसाधन प्रबंधन पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
डॉ. पी.एस. ब्रह्मानंद ने प्रतिभागियों का स्वागत किया और कृषि विकास में महिलाओं के योगदान को मान्यता देने और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी) के तहत महिला किसानों को कृषि इनपुट वितरित किए गए।

जल उपयोग दक्षता, रबी फसल किस्मों, मृदा स्वास्थ्य, पूसा डीकम्पोजर, कटाई उपरांत प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और बीज उत्पादन पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।
प्रतिभागियों ने उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के लिए भाकृअनुप-आईएआरआई की संरक्षित खेती सुविधाओं, एकीकृत कृषि प्रणाली इकाइयों तथा धान, मोटे अनाज और मक्का के खेतों का भी दौरा किया।
कार्यक्रम ने टिकाऊ एवं लचीली कृषि-खाद्य प्रणालियों के लिए वैज्ञानिक ज्ञान, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संस्थागत समर्थन के माध्यम से महिला किसानों को सशक्त बनाने की भाकृअनुप-आईएआरआई की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
16. भाकृअनुप–भारतीय कदन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद
भाकृअनुप–भारतीय कदन्न अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद ने आज लगभग 200 महिला किसानों की भागीदारी के साथ राष्ट्रीय महिला किसान दिवस मनाया। कार्यक्रम में प्रौद्योगिकी-संचालित आजीविका अवसरों, मिलेट-आधारित उद्यमिता और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, क्षमता निर्माण तथा उन्नत प्रसंस्करण अवसंरचना के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को रेखांकित किया गया।
संस्थान ने किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) से जुड़ी महिला किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और मिलेट थ्रेशर, प्रसंस्करण उपकरण तथा रोटी बनाने वाली मशीनों सहित मशीनरी तक पहुंच के माध्यम से दिए जा रहे अपने समर्थन को प्रदर्शित किया। आईसीआईसीआई फाउंडेशन के सहयोग से लगभग ₹2 करोड़ मूल्य की प्रसंस्करण अवसंरचना, जिसमें प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयां, सोलर ड्रायर, चिक्की बनाने वाली इकाइयां और कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं शामिल हैं, ने मूल्य संवर्धन, उत्पाद विविधीकरण और बाजार तक पहुंच को मजबूत किया है।

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. सी. तारा सत्यवती, निदेशक, भाकृअनुप–आईआईएमआर, ने टिकाऊ कृषि और ग्रामीण आजीविका में महिला किसानों के महत्व पर जोर दिया और उन्हें जलवायु-अनुकूल पद्धतियां अपनाने, मिलेट के साथ फसल प्रणालियों में विविधता लाने और मिलेट-आधारित उद्यमों में अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम ने महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को मजबूत करने, महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने और संपूर्ण मिलेट मूल्य श्रृंखला में आजीविका के अवसरों को बढ़ाने की भाकृअनुप–आईआईएमआर की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
(स्रोत: संबंधित भाकृअनुप संस्थान)








फेसबुक पर लाइक करें
यूट्यूब पर सदस्यता लें
X पर फॉलो करना X
इंस्टाग्राम पर लाइक करें