24 जून, 2026, नई दिल्ली/लखनऊ
भारत के ताजे फल निर्यात क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में भारतीय आम सफलतापूर्वक समुद्री मार्ग से सिंगापुर पहुँचे हैं। यह अंतरराष्ट्रीय बाजारों में किफायती एवं बड़े पैमाने पर आम निर्यात के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
सिंगापुर में भारतीय आम अपने उत्कृष्ट स्वाद, सुगंध और गुणवत्ता के लिए अत्यधिक पसंद किए जाते हैं, जहाँ बंगनपल्ली और केसर जैसी किस्मों की उपभोक्ताओं के बीच मजबूत मांग है। निर्यात को अधिक किफायती एवं प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से आईसीएआर-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (भाकृअनुप-सीआईएसएच), लखनऊ ने एपीडा के सहयोग से आम निर्यात के लिए एक वैज्ञानिक समुद्री परिवहन प्रोटोकॉल विकसित किया।

इस पहल के अंतर्गत आंध्र प्रदेश से 4.3 टन बंगनपल्ली आम की खेप को रेफर कंटेनर के माध्यम से समुद्री मार्ग से सिंगापुर निर्यात किया गया। समुद्री मार्ग के माध्यम से लॉजिस्टिक्स लागत में उल्लेखनीय कमी आती है, जो वायु मार्ग से प्रति किलोग्राम ₹150–250 की तुलना में समुद्री मार्ग से लगभग ₹13–20 प्रति किलोग्राम अनुमानित है। इससे उत्पादकों एवं निर्यातकों के लिए निर्यात अधिक व्यवहार्य बनता है तथा विदेशों के उपभोक्ताओं को भी आम अधिक किफायती कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं।
भाकृअनुप-सीआईएसएच द्वारा विकसित इस प्रोटोकॉल में अवशेष-मुक्त उत्पादन, गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज (जीएपी), वैज्ञानिक तुड़ाई, ग्रेडिंग, पैकिंग तथा कटाई उपरांत प्रबंधन को शामिल करते हुए गुणवत्ता आश्वासन की संपूर्ण प्रणाली को एकीकृत किया गया है। निर्यात किए गए फलों पर हॉट वाटर ट्रीटमेंट (एचडब्ल्यूटी) तथा सीआईएसएच-मेट वॉश का उपयोग किया गया, जो भाकृअनुप-सीआईएसएच द्वारा विकसित एक प्रौद्योगिकी है। यह प्रौद्योगिकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने, रोगों की संभावना कम करने तथा लंबी दूरी के परिवहन के दौरान फलों की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक है।
फलों के बागों की वैज्ञानिक निगरानी भाकृअनुप-सीआईएसएच के विशेषज्ञों द्वारा फल लगने से लेकर तुड़ाई तक अवशेष-सुरक्षित उत्पादन पद्धतियों तथा भाकृअनुप-सीआईएसएच द्वारा विकसित जैव-नियंत्रण प्रौद्योगिकी फ्यूसीकॉन्ट (FUSICONT) के उपयोग के साथ की गई। एपीडा द्वारा अनुमोदित पैकहाउस में प्रसंस्करण से पूर्व फलों की गुणवत्ता तथा अधिकतम अवशेष सीमा (एमआरएल) की जांच भी की गई।

भाकृअनुप-सीआईएसएच ने समुद्री परिवहन की परिस्थितियों में आम की शेल्फ लाइफ को 30 दिनों तक सफलतापूर्वक बढ़ाने में सफलता प्राप्त की है। सिंगापुर भेजी गई खेप ने 16 दिनों में अपनी यात्रा पूरी की और फल उत्कृष्ट अवस्था में पहुँचे। इनमें 20.1° ब्रिक्स टीएसएस, रोग की शून्य (Nil) घटना तथा वायु मार्ग से भेजे गए आमों के समान गुणवत्ता पाई गई।
इस सफल खेप से सिंगापुर, मलेशिया, हांगकांग तथा अन्य बाजारों में भारतीय आम के निर्यात के विस्तार को गति मिलने की संभावना है, जहाँ वर्तमान आयात का अनुमान 40–50 लाख अमेरिकी डॉलर है। साथ ही, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे बड़े बाजारों में भी नए अवसर उपलब्ध होंगे, जिनका अनुमानित बाजार मूल्य 2–2.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर है।
लागत प्रभावी समुद्री परिवहन प्रोटोकॉल का विकास भारत के आम निर्यात तंत्र को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करने तथा बागवानी क्षेत्र के सतत विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यह सफल खेप किफायती एवं सतत लॉजिस्टिक्स समाधानों के माध्यम से भारत के ताजे आम के निर्यात के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे किसानों, निर्यातकों तथा विश्वभर के उपभोक्ताओं को लाभ होगा।







फेसबुक पर लाइक करें
यूट्यूब पर सदस्यता लें
X पर फॉलो करना X
इंस्टाग्राम पर लाइक करें