भाकृअनुप-डीएफआर, पुणे ने पुणे के शिरोली गांव में खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत चलाया जागरूकता अभियान

भाकृअनुप-डीएफआर, पुणे ने पुणे के शिरोली गांव में खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत चलाया जागरूकता अभियान

11 जून, 2026, पुणे

भाकृअनुप–पुष्पकृषि अनुसंधान निदेशालय, पुणे, के वैज्ञानिकों की एक टीम ने किसानों के बीच सतत कृषि पद्धतियों और कुशल पोषक तत्व प्रबंधन के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए आज चल रहे खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत पुणे जिले के खेड़ तालुका स्थित शिरोली गांव का दौरा कि  या।

दौरे के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों के साथ संवाद किया और मृदा स्वास्थ्य तथा फसल की आवश्यकताओं के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग के महत्व पर बल दिया। चर्चाओं का केंद्र रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग के प्रतिकूल प्रभाव तथा सतत फसल उत्पादन के लिए समेकित पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता रहा।

ICAR-DFR, Pune Conducts Sensitization Drive under Khet Bachao Abhiyan at Shiroli Village, Pune

वैज्ञानिकों की टीम ने पोषक तत्व उपयोग दक्षता में सुधार, लागत में कमी तथा दीर्घकालिक मृदा उर्वरता बनाए रखने के लिए उर्वरकों के विवेकपूर्ण एवं संतुलित उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। वैज्ञानिकों ने मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, फसल अवशेष तथा अन्य स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जैविक संसाधनों जैसे वैकल्पिक पोषक तत्व स्रोतों की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी। इसके अतिरिक्त, मृदा में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाने, मृदा संरचना में सुधार करने तथा मृदा उर्वरता को बनाए रखने के लिए हरी खाद के महत्व पर भी चर्चा की गई।

कार्यक्रम के अंतर्गत वैज्ञानिकों ने गांव में गुलाब तथा अन्य पुष्प फसलों की खेती करने वाले पुष्पकृषि किसानों के खेतों का भी दौरा किया। फसल वृद्धि, पोषक तत्व प्रबंधन पद्धतियों तथा फसल के समग्र स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए खेतों का निरीक्षण किया गया।

इन निरीक्षणों के आधार पर वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याओं के समाधान हेतु उपयुक्त वैज्ञानिक हस्तक्षेपों की अनुशंसा की तथा पुष्पकृषि में सतत एवं संसाधन-संरक्षणकारी पद्धतियों को अपनाने पर चर्चा की।

कार्यक्रम में दो महिलाओं सहित कुल 28 किसानों ने भाग लिया।

(स्रोत: भाकृअनुप–पुष्पकृषि अनुसंधान निदेशालय, पुणे)

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