31 जुलाई, 2026, नदिया, पश्चिम बंगाल
जलवायु-स्मार्ट और सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की पहल के अंतर्गत, भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, कृषि विज्ञान केन्द्र, नदिया (अतिरिक्त) ने भाकृअनुप-केन्द्रीय मीठे पानी की जलीय कृषि संस्थान (सीआईएफए), कल्याणी अनुसंधान केन्द्र, नदिया के सहयोग से नदिया जिले के किसानों के लिए एजोला खेती पर प्रशिक्षण-सह-प्रदर्शन एवं आदान वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य खरीफ धान की खेती तथा पशु आहार के लिए एजोला, जो एक तीव्र गति से बढ़ने वाली जलीय फर्न है, के दोहरे लाभों को लोकप्रिय बनाना था। वैज्ञानिकों ने एजोला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह एक पर्यावरण-अनुकूल जैव संसाधन है, जो खेती की लागत को कम करते हुए कृषि उत्पादकता बढ़ाने में सक्षम है। तकनीकी सत्र के दौरान किसानों को एजोला संवर्धन की वैज्ञानिक विधियों, पोर्टेबल एजोला बैग की स्थापना, पोषक तत्व प्रबंधन, कटाई तकनीकों तथा रखरखाव संबंधी प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया। प्रत्यक्ष प्रदर्शन के माध्यम से प्रतिभागियों को खेत स्तर पर एजोला उत्पादन और उसके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी प्रदान की गई।

विशेषज्ञों ने बताया कि एजोला का धान के खेतों में जैव उर्वरक के रूप में प्रभावी उपयोग किया जा सकता है। नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले सायनोबैक्टीरिया के साथ इसकी सहजीवी संबंधता मृदा उर्वरता बढ़ाने, खरपतवार वृद्धि को नियंत्रित करने, मृदा नमी संरक्षण करने तथा रासायनिक नाइट्रोजन उर्वरकों की आवश्यकता को कम करने में सहायक होती है। इसके अतिरिक्त, एजोला डेयरी पशुओं, बकरियों, भेड़ों, पोल्ट्री, बत्तखों और मछलियों के लिए प्रोटीन-समृद्ध पूरक आहार के रूप में कार्य करता है, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य, दुग्ध उत्पादन और वृद्धि में सुधार होता है तथा आहार लागत में कमी आती है।
कार्यक्रम के अंतर्गत सहभागी किसानों को एजोला स्टार्टर कल्चर के साथ आवश्यक आदान सामग्री वितरित की गई, ताकि वे अपने खेतों में इस तकनीक को तुरंत अपनाने में सक्षम हो सकें। किसानों को एकीकृत कृषि प्रणाली (आईएफएस) दृष्टिकोण के तहत फसल एवं पशुपालन उद्यमों के साथ एजोला उत्पादन को एकीकृत करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया, जिससे उनकी आय में सतत वृद्धि सुनिश्चित हो सके।

इस अवसर पर भाकृअनुप-एनडीआरआई-केवीके के वैज्ञानिकों ने कहा कि एजोला तकनीक को अपनाने से पर्यावरण-अनुकूल धान उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, पशुधन पोषण में सुधार होगा, बाहरी कृषि आदानों पर निर्भरता कम होगी तथा नदिया जिले में जलवायु-सहिष्णु कृषि को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
कार्यक्रम का समापन एक संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ, जिसमें किसानों ने अपने अनुभव साझा किए तथा एजोला खेती और इसके धान के खेतों एवं पशु आहार में उपयोग से संबंधित तकनीकी प्रश्नों का समाधान प्राप्त किया। यह पहल भाकृअनुप-एनडीआरआई, केवीके, नदिया (अतिरिक्त) तथा भाकृअनुप-सीआईएफए, कल्याणी अनुसंधान केंद्र की किसानों की आजीविका सुदृढ़ करने और जिले में एकीकृत कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने हेतु सतत कृषि प्रौद्योगिकियों के प्रसार के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
(स्रोत: भाकृअनुप-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, कृषि विज्ञान केन्द्र, नदिया (अतिरिक्त))







फेसबुक पर लाइक करें
यूट्यूब पर सदस्यता लें
X पर फॉलो करना X
इंस्टाग्राम पर लाइक करें