30 जुलाई, 2026, मालदा
भाकृअनुप–केवीके (सीआईएसएच), मालदा, जो भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), कोलकाता, के अधिकार क्षेत्र में कार्यरत राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से एनएचबी वित्तीय सहायता योजनाओं पर एक जिला स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में 130 से अधिक हितधारकों ने भाग लिया, जिनमें किसान, एफपीओ, उद्यमी, बैंकर, वैज्ञानिक और सरकारी अधिकारी शामिल थे।
कार्यक्रम का उद्घाटन श्री राजनवीर सिंह कपूर, आईएएस, जिला मजिस्ट्रेट, मालदा ने किया। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने में बागवानी की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला तथा हितधारकों से आधुनिक बागवानी उद्यमों के विकास के लिए एनएचबी की वित्तीय सहायता का लाभ उठाने का आग्रह किया। कार्यक्रम में एनएचबी, नाबार्ड, एपीडा, जिला प्रशासन, वित्तीय संस्थानों तथा संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. प्रदीप डे, भाकृअनुप–अटारी, कोलकाता, ने कहा, “बागवानी आधारित विकास को गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, मजबूत संस्थागत समन्वय और वित्तीय सहायता तक निर्बाध पहुंच द्वारा संचालित किया जाना चाहिए। क्लीन प्लांट प्रोग्राम और क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम जैसी पहलें परिवर्तनकारी नीतिगत हस्तक्षेप हैं, जो मूल्य श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करेंगी, किसानों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाएंगी और सतत ग्रामीण उद्यमों का सृजन करेंगी। आईसीएआर–एटारी, कोलकाता तथा ज़ोन–V के केवीके, विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण को प्राप्त करने हेतु प्रौद्योगिकी-आधारित, बाजारोन्मुखी और जलवायु-सहिष्णु बागवानी विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण एनएचबी के क्लीन प्लांट प्रोग्राम के अंतर्गत भाकृअनुप–सीआईएसएच, मालदा के क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र में एक मेगा क्लीन प्लांट सेंटर की स्वीकृति की घोषणा थी। यह केन्द्र देशभर में स्वीकृत केवल नौ ऐसी सुविधाओं में से एक है। यह उच्च गुणवत्ता वाली, रोगमुक्त रोपण सामग्री का उत्पादन और वितरण करेगा, जिससे पूर्वी भारत के बागवानी क्षेत्र को महत्वपूर्ण मजबूती मिलेगी।
प्रतिभागियों को यह भी जानकारी दी गई कि मालदा को एनएचबी के क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम (सीडीपी) के अंतर्गत एक संभावित बागवानी क्लस्टर के रूप में चिन्हित किया गया है। इससे उत्पादन, फसलोपरांत प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, लॉजिस्टिक्स, ब्रांडिंग और बाजार संपर्कों से संबंधित एकीकृत हस्तक्षेपों के लिए व्यापक वित्तीय सहायता के अवसर उपलब्ध होंगे।

तकनीकी सत्र के दौरान डॉ. तपन कुमार गिरी, उपनिदेशक, एनएचबी, ने विभिन्न एनएचबी योजनाओं के अंतर्गत पात्रता मानदंड, आवेदन प्रक्रियाओं तथा उपलब्ध वित्तीय सहायता की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने किसान उत्पादक संगठनों, निजी कंपनियों और अन्य पात्र एजेंसियों को क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया।
सतत सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इंग्लिश बाज़ार, गाजोल, हबीबपुर और कालियाचक प्रखंडों के चयनित किसानों को सात सब्जी फसलों की उन्नत किस्मों वाले सब्जी बीज किट वितरित किए गए। लाभार्थियों को सतत पोषक तत्व प्रबंधन के लिए जैव उर्वरक भी प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त, उत्तम कृषि पद्धतियों (जीएपी) को अपनाने तथा फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए 10 फुट-ऑपरेटेड स्प्रेयर और 15 नैपसैक स्प्रेयर वितरित किए गए।
इस कार्यक्रम ने प्रौद्योगिकी प्रसार, संस्थागत समन्वय, वित्तीय सहायता और उद्यमिता संवर्धन के माध्यम से बागवानी विकास को गति देने के लिए एनएचबी और भाकृअनुप–सीआईएसएच, केवीके मालदा की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया, जिससे मालदा जिले में अधिक सुदृढ़ और लाभकारी बागवानी क्षेत्र के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कोलकाता)







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