23 जून, 2026, बेंगलुरु
श्री ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी, अतिरिक्त सचिव, डीएआरई एवं सचिव, भाकृअनुप ने सीएसआर एवं प्रौद्योगिकी कॉन्क्लेव–2026 के दौरान भाकृअनुप–राष्ट्रीय पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान एवं रोग सूचना विज्ञान संस्थान (भाकृअनुप-निवेदी), बेंगलुरु का दौरा किया। इस यात्रा ने भारत की पशु स्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए उन्नत रोग आसूचना तथा पूर्वानुमानात्मक विश्लेषण के उपयोग के महत्व को रेखांकित किया।
यात्रा का शुभारंभ डॉ. बलदेव आर. गुलाटी, निदेशक, भाकृअनुप-निवेदी तथा भाकृअनुप-एनआईएएनपी के निदेशक डॉ. ए. साहू की उपस्थिति में पौधरोपण के साथ हुआ। श्री त्रिपाठी ने संस्थान की प्रमुख सुविधाओं का अवलोकन किया, जिनमें पेस्ट दे पेटिट्स रूमिनेंट्स (पीपीआर) एवं लेप्टोस्पायरोसिस के लिए डब्ल्यूओएएच संदर्भ प्रयोगशालाएँ, राष्ट्रीय पशु रोग संदर्भ विशेषज्ञ प्रणाली (एनएडीआरईएस) तथा निवेदी एग्री-बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर (नाविक) शामिल थे।
दौरे के दौरान डॉ. गुलाटी ने संस्थान के अधिदेश, प्रमुख उपलब्धियों तथा रोग निगरानी, पूर्वानुमान, निदान, महामारी विज्ञान संबंधी आसूचना तथा रोग नियंत्रण कार्यक्रमों में सहयोग के माध्यम से राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में उसके महत्वपूर्ण योगदान का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी) के लिए भाकृअनुप-निवेदी की वैज्ञानिक परामर्शदाता की भूमिका पर भी प्रकाश डाला तथा रोग आसूचना एवं साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में संस्थान की भूमिका को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए निरंतर वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
संस्थान की उपलब्धियों की सराहना करते हुए श्री त्रिपाठी ने रोग विश्लेषण, डिजिटल महामारी विज्ञान, निदान तथा नवाचार के क्षेत्र में भाकृअनुप-निवेदी के योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने रोग भार एवं आर्थिक हानि का व्यवस्थित आकलन करने, रोग नियंत्रण कार्यक्रमों के लाभ-लागत परिणामों का मूल्यांकन करने तथा पशुपालकों पर उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का प्रलेखन करने के महत्व पर बल दिया।
पशु रोग निगरानी की भावी दिशा पर प्रकाश डालते हुए श्री त्रिपाठी ने जिला स्तर से आगे बढ़कर प्रखंड एवं ग्राम स्तर तक पूर्वानुमानात्मक रोग विश्लेषण को सुदृढ़ करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रारंभिक चेतावनी तंत्र को मजबूत बनाने, रोगों के प्रति तैयारी में सुधार करने तथा पशुधन स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए समयबद्ध नीतिगत हस्तक्षेपों को समर्थन देने हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं मशीन लर्निंग (एमएल) आधारित पूर्वानुमान प्रणालियों के साथ गणितीय मॉडलिंग के एकीकरण की भी वकालत की।
(स्रोत: भाकृअनुप–राष्ट्रीय पशु चिकित्सा महामारी विज्ञान एवं रोग सूचना विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु)







फेसबुक पर लाइक करें
यूट्यूब पर सदस्यता लें
X पर फॉलो करना X
इंस्टाग्राम पर लाइक करें