भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, बैरकपुर ने सतत जलीय संसाधन प्रबंधन हेतु उन्नत आणविक उपकरणों में युवा शोधकर्ताओं को किया प्रशिक्षित

भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, बैरकपुर ने सतत जलीय संसाधन प्रबंधन हेतु उन्नत आणविक उपकरणों में युवा शोधकर्ताओं को किया प्रशिक्षित

4 अगस्त, 2026, बैरकपुर

मत्स्य अनुसंधान को अत्याधुनिक विज्ञान के माध्यम से आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए, भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीआईएफआरआई), बैरकपुर, ने आज "जलीय संसाधन प्रबंधन हेतु आणविक उपकरण" विषय पर तीन दिवसीय गहन व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में देशभर के विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों से विद्यार्थी, संकाय सदस्य तथा शोधकर्ता भाग ले रहे हैं।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आधुनिक आणविक जीवविज्ञान तकनीकों में तकनीकी विशेषज्ञता विकसित करने के लिए तैयार किया गया है, जो मत्स्य अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण और सतत जलीय संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में तेजी से परिवर्तन ला रही हैं।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए डॉ. प्रदीप निदेशक डे, निदेशक, भाकृअनुप-सीआईएफआरआई, ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता ह्रास और उभरती जलीय बीमारियों जैसी चुनौतियों के बीच साक्ष्य-आधारित मत्स्य प्रबंधन के लिए आणविक प्रौद्योगिकियां अपरिहार्य होती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जीनोमिक्स, डीएनए बारकोडिंग, पर्यावरणीय डीएनए (eDNA) और जैव-सूचना विज्ञान (बायोइन्फॉर्मेटिक्स) जैसे उपकरण जैव विविधता मूल्यांकन, आनुवंशिक संसाधन संरक्षण, रोग निगरानी और सतत जलीय कृषि को सुदृढ़ बना रहे हैं।

ICAR-CIFRI, Barrackpore Equips Young Researchers with Advanced Molecular Tools for Sustainable Aquatic Resource Management

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए डॉ. डे ने युवा शोधकर्ताओं से आग्रह किया कि वे सतत जलीय संसाधन प्रबंधन के लिए नवाचारी एवं विज्ञान-आधारित समाधान विकसित करने हेतु आणविक उपकरणों को पारंपरिक मत्स्य विज्ञान के साथ एकीकृत करें। उन्होंने जोर दिया कि जलीय जैव विविधता संरक्षण, जैव सुरक्षा और ब्लू इकोनॉमी से संबंधित राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को समर्थन देने के लिए उन्नत आणविक प्रौद्योगिकियों में मानव संसाधन क्षमता को सुदृढ़ करना आवश्यक है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, नवाचार और वैज्ञानिक सहयोग के माध्यम से कुशल शोधकर्ताओं को तैयार करने के लिए भाकृअनुप-सीआईएफआरआई की प्रतिबद्धता दोहराई।

उद्घाटन सत्र में मत्स्य विज्ञान में जीनोमिक्स, प्रोटीओमिक्स और बायोइन्फॉर्मेटिक्स के बढ़ते अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला गया। यह रेखांकित किया गया कि उन्नत आणविक तकनीकों में विशेषज्ञता को मजबूत करना नवाचार को बढ़ावा देने, अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार करने और मत्स्य क्षेत्र की सतत वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्यों, संरचना और अपेक्षित परिणामों की भी रूपरेखा प्रस्तुत की गई तथा प्रतिभागियों का स्वागत किया गया।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को अत्याधुनिक आणविक तकनीकों का गहन सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें डीएनए एवं प्रोटीन पृथक्करण, जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस, पॉलिमरेज़ चेन रिएक्शन (पीसीआर), न्यूक्लिक अम्लों और प्रोटीनों का लक्षण-वर्णन तथा अनुक्रम विश्लेषण और आणविक आंकड़ों की व्याख्या के लिए प्रारंभिक बायोइन्फॉर्मेटिक्स शामिल हैं। कार्यक्रम में प्रयोगशाला प्रोटोकॉल, उपकरणों के उपयोग, समस्या समाधान और डेटा विश्लेषण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे प्रतिभागी वर्तमान अनुसंधान आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावहारिक कौशल प्राप्त कर सकें।

ICAR-CIFRI, Barrackpore Equips Young Researchers with Advanced Molecular Tools for Sustainable Aquatic Resource Management

उद्घाटन सत्र का एक प्रमुख आकर्षण "जलीय संसाधन प्रबंधन हेतु आणविक उपकरण" विषयक प्रशिक्षण पुस्तिका का विमोचन था। एक व्यापक संदर्भ संसाधन के रूप में विकसित यह पुस्तिका मूलभूत सैद्धांतिक अवधारणाओं और व्यावहारिक प्रयोगशाला पद्धतियों का समेकन करती है, जिससे मानकीकृत प्रयोगशाला प्रक्रियाओं को बढ़ावा मिले। इसे जलीय संसाधन प्रबंधन और आणविक अनुसंधान से जुड़े शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और पेशेवरों के लिए एक मूल्यवान मार्गदर्शिका के रूप में तैयार किया गया है।

उन्नत आणविक प्रौद्योगिकियों में विशेषज्ञता को बढ़ावा देकर यह प्रशिक्षण कार्यक्रम मानव संसाधन क्षमता को सुदृढ़ करने, अनुसंधान क्षमताओं को बढ़ाने तथा मत्स्य एवं जलीय विज्ञानों में आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी को अपनाने में तेजी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा। इससे भारत के अमूल्य जलीय संसाधनों के सतत प्रबंधन और संरक्षण को भी बल मिलेगा।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों से कुल 12 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।

(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान, बैरकपुर)

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