21 अप्रैल, 2026, नई दिल्ली
राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा प्रणाली (एनएआरईएस) तथा सीजीआईएआर के प्रयासों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से कृषि के सौरिकीकरण पर राष्ट्रीय मंच का सफल आयोजन भाकृअनुप–भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-आएआरआई), नई दिल्ली, द्वारा अंतरराष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान (आईडब्ल्यूएमआई) के सहयोग से किया गया। यह कार्यक्रम भाकृअनुप-आईएआरआई परिसर में हाइब्रिड मोड में आयोजित हुआ, जिसमें देशभर के शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं तथा विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया।
अपने संबोधन में डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-आएआरआई, ने कृषि में सौरीकरण को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक कार्ययोजना की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सिंचाई, कृषि कार्यों और एग्री वोल्टेक्स को प्राथमिक क्षेत्र बताया।

उन्होंने नवाचार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भवनों की छतें और कृषि संरचनाएं ऊर्जा उत्पादन की महत्वपूर्ण परिसंपत्तियां बन सकती हैं। उन्होंने सौरीकरण को अनुसंधान का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बताते हुए फसल-विशिष्ट दृष्टिकोण, सौर पैनलों की धूल सफाई दक्षता में सुधार तथा लघु एवं सीमांत किसानों के बीच इसके प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने हरित ऊर्जा को राष्ट्रीय विकास से जोड़ने और प्रति व्यक्ति ऊर्जा उपलब्धता बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
डॉ. आलोक सिक्का, पूर्व उप-महानिदेशक (एनआरएम), आईडब्ल्यूएमआई के एमेरिटस वैज्ञानिक एवं भाकृअनुप, ने कहा कि भारत में बड़े पैमाने पर चल रही पहलों के कारण कृषि सौरीकरण उन्नत चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने प्रभावी ऊर्जा प्रबंधन के माध्यम से भूजल संरक्षण पर बल दिया और कहा कि सौरीकरण से अतिरिक्त ऊर्जा को टिकाऊ ढंग से वापस प्रणाली में जोड़ा जा सकता है। उन्होंने खाद्य, जल, ऊर्जा तथा जलवायु प्रणालियों के व्यापक ढांचे में सौर ऊर्जा को शामिल करने की आवश्यकता बताई, ताकि खाद्य सुरक्षा और भूमि उपयोग से जुड़ी चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए जल प्रौद्योगिकी केंद्र (डब्ल्यू), भाकृअनुप-आईएआरआई के परियोजना निदेशक एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पी.एस. ब्रह्मानंद ने कृषि सौरीकरण को आगे बढ़ाने में सहयोगात्मक और प्रौद्योगिकी आधारित दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला।

आईडब्यूएमआई भारत एवं बांग्लादेश के अंतरिम कंट्री प्रतिनिधि डॉ. गोपाल कुमार ने विकसित भारत और नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य प्राप्त करने में सौरीकरण की भूमिका बताई। उन्होंने कहा कि किसान अब केवल ऊर्जा उपभोक्ता नहीं, बल्कि ऊर्जा उत्पादक तथा संभावित विक्रेता भी बन सकते हैं। जब यह परिवर्तन खेत स्तर पर होगा, तभी इसका वास्तविक प्रभाव दिखाई देगा।
मंच पर वैज्ञानिकों द्वारा एग्री वोल्टेक्स, सौरीकरण के मार्ग, सिंचाई-ऊर्जा संबंध तथा सौर ऊर्जा आधारित कृषि नवाचारों पर तकनीकी प्रस्तुतियां भी दी गईं। यह कार्यक्रम ज्ञान आदान-प्रदान, सहयोग बढ़ाने और भारतीय कृषि के सतत एवं समावेशी सौरीकरण को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।
(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)







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