भाकृअनुप-आईएआरआई तथा दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के बीच वैज्ञानिक हरित पट्टी विकसित करने हेतु समझौता

भाकृअनुप-आईएआरआई तथा दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के बीच वैज्ञानिक हरित पट्टी विकसित करने हेतु समझौता

21 अप्रैल, 2026, नई दिल्ली

सतत शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-आईएआरआई), नई दिल्ली और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन के किनारे भारत की पहली वैज्ञानिक रूप से डिजाइन की गई हरित पट्टी विकसित करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया है। यह समझौता डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई; डॉ. विश्वनाथन चिन्नुसामी, संयुक्त निदेशक (अनुसंधान); तथा श्री मनुज सिंघल, निदेशक, डीएमआरसी, सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस पहल का उद्देश्य विज्ञान आधारित उपायों के माध्यम से राष्ट्रीय राजधानी को अधिक हरित और स्वच्छ बनाना है।

इस सहयोग के तहत भाकृअनुप-आईएआरआई, आदर्श नगर और जहांगीरपुरी मेट्रो स्टेशनों के बीच 1.5 किलोमीटर लंबे हिस्से में एक सुदृढ़ शहरी हरित गलियारा विकसित करने के लिए वैज्ञानिक परामर्श और तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेगा। परियोजना का लक्ष्य गहरी छाया, वाहन प्रदूषण और अत्यधिक गर्मी जैसी चुनौतियों वाले कंक्रीट मीडियन को एक जीवंत, जलवायु-अनुकूल एवं प्रदूषण कम करने वाले हरित पारिस्थितिकी तंत्र में बदलना है।

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इस अवसर पर डॉ. चेरुकमल्ली श्रीनिवास राव, निदेशक, भाकृअनुप-आईएआरआई, ने कहा कि यह समझौता कृषि विज्ञान को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर शहरी अवसंरचना तक ले जाने का परिवर्तनकारी प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल वायु गुणवत्ता में सुधार और शहरी जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह परियोजना वैज्ञानिक अनुसंधान और वास्तविक शहरी चुनौतियों के प्रभावी समन्वय का उदाहरण है, जिससे सतत शहरों के लिए प्रभावशाली समाधान उपलब्ध होंगे।

श्री सिंघल, निदेशक, डीएमआरसी, ने कहा कि यह पहल मेट्रो अवसंरचना विकास के लिए दूरदर्शी दृष्टिकोण का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास जताया कि सफल क्रियान्वयन के बाद इस मॉडल को पूरे दिल्ली मेट्रो नेटवर्क में विस्तारित किया जा सकता है, जिससे एशिया के सबसे लंबे वैज्ञानिक रूप से प्रबंधित हरित मेट्रो गलियारों में से एक विकसित हो सकता है।

एक वर्ष की इस पायलट परियोजना का बजट ₹20.29 लाख (जीएसटी सहित) है। इसे वैज्ञानिक रूप से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिसमें स्थल मूल्यांकन, बायोफिलिक डिज़ाइन, तथा एयर पॉल्यूशन टॉलरेंस इंडेक्स (एपीटी) के आधार पर प्रदूषण सहनशील पौधों का चयन शामिल है। परियोजना में बायोचार आधारित मृदा सुधार, माइकोराइज़ल तकनीक, IoT आधारित स्मार्ट सिंचाई प्रणाली तथा निरंतर निगरानी तथा मूल्यांकन जैसी नवाचार तकनीकों को भी शामिल किया जाएगा। स्वच्छ वायु, जलवायु लचीलापन और सतत शहरी विकास की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप यह पहल भाकृअनुप-आईएआरआई और डीएमआरसी को साक्ष्य आधारित शहरी हरियाली के क्षेत्र में अग्रणी स्थान पर स्थापित करती है।

(स्रोत: भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली)

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