13-15 अक्टूबर, 2026, फेक, नागालैंड
ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और कुक्कुट पालन आधारित सतत आय सृजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, “एनईएच कार्यक्रम के तहत वैज्ञानिक बैकयार्ड कुक्कुट प्रबंधन के माध्यम से ग्रामीण आजीविका का सशक्तिकरण” शीर्षक से तीन दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम 13 से 15 अक्टूबर, 2026 तक केवीके फेक में आयोजित किया गया।
इस पहल का आयोजन भाकृअनुप–भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली द्वारा भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र, फेक के सहयोग से किया गया। यह केंद्र भाकृअनुप–राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केन्द्र, मेडजिफेमा के अंतर्गत तथा भाकृअनुप–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, जोन VII, उमियम के अधीन कार्यरत है।
कार्यक्रम का आयोजन भाकृअनुप–केवीके फेक के नेतृत्व में किया गया। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक बैकयार्ड कुक्कुट प्रबंधन में किसानों के तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक कौशल को बढ़ाना था, जिसमें घरेलू आय में सुधार, पोषण सुरक्षा को मजबूत करने और ग्रामीण समुदायों के लिए सतत आजीविका के अवसर सृजित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान विषय विशेषज्ञों द्वारा विशेषज्ञ व्याख्यानों, तकनीकी सत्रों और व्यावहारिक प्रशिक्षण गतिविधियों की एक श्रृंखला आयोजित की गई, ताकि प्रतिभागियों को वैज्ञानिक कुक्कुट पालन और स्वास्थ्य प्रबंधन में व्यावहारिक ज्ञान और कौशल प्रदान किया जा सके।

कार्यक्रम के दौरान परियोजना के प्रधान अन्वेषक ने ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका के एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में बैकयार्ड कुक्कुट पालन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। सत्र में उपयुक्त आवास, संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य देखभाल, रोग निवारण, स्वच्छता प्रबंधन, उत्पाद मूल्य संवर्धन और प्रभावी विपणन रणनीतियों सहित उन्नत कुक्कुट पालन पद्धतियों को अपनाने के महत्व पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों को उत्पादकता में सुधार और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त तकनीकी ज्ञान को लागू करने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया।
कुक्कुट में टीकाकरण प्रोटोकॉल और निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर एक तकनीकी सत्र भी आयोजित किया गया। सत्र में विभिन्न प्रकार के टीकों, उनके प्रयोग के तरीकों और रोग के जोखिम को कम करने तथा बैकयार्ड कुक्कुट झुंडों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक जैव सुरक्षा सावधानियों को शामिल किया गया।
किसान–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण घटक रहा, जिससे प्रतिभागियों को अनुभवों का आदान-प्रदान करने, क्षेत्र-स्तरीय समस्याओं पर चर्चा करने और कुक्कुट पक्षियों के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेषज्ञ सलाह प्राप्त करने का अवसर मिला।

प्रशिक्षण के दौरान प्रदर्शित प्रौद्योगिकियों को अपनाने की सुविधा प्रदान करने के लिए प्रतिभागियों को स्टार्टर फीड, फीडर, ड्रिंकर, मल्टीविटामिन सप्लीमेंट और मल्टीमिनरल सप्लीमेंट के साथ कुक्कुट चूजे प्रदान किए गए। इस वितरण का उद्देश्य किसानों को अपनी बैकयार्ड कुक्कुट इकाइयों को शुरू करने या मजबूत करने तथा अनुशंसित प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने में सहायता करना था।
यह कार्यक्रम किसानों की तकनीकी दक्षता में सुधार और छोटे पैमाने के कुक्कुट उद्यमों को बढ़ावा देने की दिशा में एक सहयोगात्मक प्रयास का प्रतिनिधित्व करता है, जिसका उद्देश्य नागालैंड के फेक जिले में ग्रामीण समुदायों के बीच पोषण संबंधी कल्याण को बढ़ाना, पूरक आय सृजित करना और आजीविका सुरक्षा को समर्थन देना है।
(स्रोत: भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र, फेक, नागालैंड)








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