29 सितंबर, 2026, मोतिहारी, बिहार
स्वच्छता ही सेवा (एसएचएस)–2026/स्वच्छता पखवाड़ा के तहत, भाकृअनुप–महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी ने आज स्वच्छता जागरूकता के लिए मानव श्रृंखला का आयोजन किया, ताकि स्वच्छता, साफ-सफाई, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और स्वच्छ एवं स्वस्थ परिवेश के निर्माण के लिए जन भागीदारी के संदेश को सुदृढ़ किया जा सके। संस्थान के वैज्ञानिकों, तकनीकी एवं प्रशासनिक कर्मियों, संविदा कर्मचारियों तथा अन्य स्टाफ सदस्यों ने इस पहल में सक्रिय रूप से भाग लिया।
प्रतिभागियों ने हाथों में हाथ डालकर मानव श्रृंखला बनाई, जो स्वच्छता के प्रति एकता और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक थी। इस गतिविधि के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि स्वच्छता केवल किसी एक व्यक्ति या संस्थान की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। इस पहल के माध्यम से प्रतिभागियों ने स्वच्छ कार्यस्थलों, सार्वजनिक स्थानों और आसपास के समुदायों को स्वच्छ बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम के दौरान स्वच्छ एवं स्वच्छतापूर्ण संस्थागत और सार्वजनिक स्थानों, कूड़ा फैलाने की रोकथाम, उचित अपशिष्ट निपटान तथा स्रोत पर ही अपशिष्ट के पृथक्करण के बारे में जागरूकता पैदा की गई। प्रतिभागियों को जैव-अपघटनीय, पुनर्चक्रण योग्य और अन्य प्रकार के अपशिष्ट को उचित रूप से अलग करने तथा कार्यस्थलों के साथ-साथ अपने घरों और समुदायों में जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
सतत अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण के रूप में कम करना, पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण (3आर) के सिद्धांतों पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों को अनावश्यक खपत को कम करने, जहां संभव हो वहां सामग्रियों का पुन: उपयोग करने और पुनर्चक्रण योग्य सामग्रियों का उचित पुनर्चक्रण सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। अभियान में एकल-उपयोग प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, जिम्मेदार खपत तथा पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को अपनाने को भी बढ़ावा दिया गया।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए डॉ. राघवेंद्र सिंह, निदेशक, भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई, ने जोर दिया कि स्वच्छता को समय-समय पर चलने वाले अभियानों तक सीमित रखने के बजाय इसे दैनिक व्यवहार का अभिन्न हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छ परिवेश का मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण की गुणवत्ता और सतत विकास से गहरा संबंध है। उन्होंने संस्थान के कर्मियों से उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कार्यस्थल से स्वच्छता का संदेश अपने घरों और समुदायों तक ले जाने का आह्वान किया।
मानव श्रृंखला एकता, व्यवहार परिवर्तन और जन भागीदारी की भावना का प्रतिनिधित्व करती है, जो स्वच्छता मिशन के केंद्र में हैं। प्रतिभागियों को स्रोत पर ही कचरे का पृथक्करण करने, अपशिष्ट उत्पादन को न्यूनतम करने, कूड़ा फैलाने और एकल-उपयोग प्लास्टिक से बचने तथा अपने दैनिक जीवन में 3आर सिद्धांतों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इस बात पर जोर दिया गया कि सतत स्वच्छता तभी हासिल की जा सकती है, जब जागरूकता को नियमित व्यक्तिगत और सामूहिक कार्रवाई में बदला जाए।
कार्यक्रम में स्वच्छता ही सेवा के व्यापक उद्देश्यों पर भी प्रकाश डाला गया, जो नियमित सफाई से आगे बढ़कर जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरणीय स्थिरता, नागरिक भागीदारी और स्वच्छता प्रयासों के प्रति सम्मान को समाहित करते हैं। प्रतिभागियों ने सड़कों, कार्यालय परिसरों, सार्वजनिक स्थानों और सामुदायिक क्षेत्रों को स्वच्छ रखने तथा अपशिष्ट को अनियंत्रित रूप से फेंकने से हतोत्साहित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
मानव श्रृंखला का समापन परिवेश को स्वच्छ रखने, उचित अपशिष्ट पृथक्करण का अभ्यास करने, अपशिष्ट उत्पादन को न्यूनतम करने, 3आर को बढ़ावा देने और अन्य लोगों को स्वच्छता गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करने की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ।
इस पहल के माध्यम से भाकृअनुप-एमजीआईएफआरआई ने स्वच्छता ही सेवा और स्वच्छ भारत मिशन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई तथा यह संदेश दिया कि “स्वच्छता सभी की जिम्मेदारी है” और स्वच्छ, स्वस्थ, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार तथा विकसित भारत के निर्माण के लिए सतत जन भागीदारी आवश्यक है।
(स्रोत: भाकृअनुप–महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी)







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