14 सितंबर, 2026, अरुणाचल प्रदेश
भाकृअनुप-केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, कोलकाता केंद्र ने अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले के सुनपुरा में पारंपरिक जलीय कृषि पद्धतियों से मछली उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाने के लिए कार्प पॉलीकल्चर में प्रजातियों के विविधीकरण पर एक वैज्ञानिक प्रदर्शन कार्यक्रम शुरू किया है।

एनईएच योजना के तहत कार्यान्वित इस कार्यक्रम का आयोजन क्षेत्र के 25 किसानों के तालाबों में पहली बार किया जा रहा है। ‘किसानों को अनुसंधान में शामिल करने’ की अवधारणा पर आधारित पद्धति प्रदर्शन की शुरुआत उन किसानों के तालाबों में की गई, जिन्होंने पहले भाकृअनुप-सिफे द्वारा आयोजित कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया था।
कार्यक्रम के एक भाग के रूप में वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य हितधारकों की उपस्थिति में मछली अंगुलिकाओं और पेलेटेड मछली आहार सहित महत्वपूर्ण जलीय कृषि इनपुट वितरित किए गए।

भाग लेने वाले किसानों ने भाकृअनुप-सिफे के वैज्ञानिकों की उपस्थिति में अपने तालाबों में मछली अंगुलिकाओं का संचयन किया। वैज्ञानिक जलीय कृषि पद्धतियों को अपनाने में सुविधा प्रदान करने के लिए कार्प पॉलीकल्चर हेतु संचयन-पूर्व, संचयन और संचयन-पश्चात प्रबंधन पद्धतियों पर तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया।
प्रदर्शन कार्यक्रम से क्षेत्र के लगभग 100 मछली किसानों के बीच उन्नत कार्प पॉलीकल्चर पद्धतियों को अपनाने को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, जिससे लोहित जिले और अरुणाचल प्रदेश राज्य में मछली उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार करने में योगदान मिलेगा।

कुल 25 किसानों, जिनमें चार महिलाएं शामिल थीं, ने विस्तार कार्यक्रम में भाग लिया और महत्वपूर्ण जलीय कृषि इनपुट प्राप्त किए।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान, कोलकाता केंद्र)







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