भाकृअनुप-सीसीएआरआई, गोवा ने टिकाऊ कृषि में जैविक पोषक स्रोतों के महत्व पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया

भाकृअनुप-सीसीएआरआई, गोवा ने टिकाऊ कृषि में जैविक पोषक स्रोतों के महत्व पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया

21 अप्रैल, 2026, गोवा

भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र, उत्तर गोवा तथा भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-सीसीएआरआई), गोवा, ने आज उत्तर गोवा के बिचोलिम तालुका के मायेम तथा वालपोई तालुका के केरी में जैविक स्रोतों के उपयोग पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन एवं संतुलित उर्वरक उपयोग पर राष्ट्रीय जागरूकता अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना तथा किसानों में जैविक इनपुट्स के प्रति समझ विकसित करना था।

ICAR-CCARI, Goa Organises Awareness Programme on the Importance of Organic Nutrient Sources in Sustainable Agriculture

विशेषज्ञों ने समृद्ध गोबर खाद, किण्वित तरल जैविक खाद, कम्पोस्टिंग तकनीकों तथा जैव उर्वरकों जैसे जैविक इनपुट्स के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ये जैविक स्रोत मृदा संरचना सुधारने, जल धारण क्षमता बढ़ाने, पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाने, लाभकारी सूक्ष्मजीव गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

चर्चा के दौरान जैविक खेती में गोबर तथा गौमूत्र के उपयोग पर भी जानकारी दी गई। साथ ही जीवामृत, बीजामृत और पंचगव्य जैसे पारंपरिक घोलों की तैयारी एवं लाभों के बारे में बताया गया, जो पौधों की वृद्धि और मृदा उर्वरता बढ़ाने में सहायक हैं।

इसके अतिरिक्त, मृदा स्वास्थ्य सुधारने के लिए अंतरवर्तीय फसल प्रणाली, जैविक सब्जी उत्पादन तथा मृदा नमी संरक्षण हेतु मल्चिंग के महत्व पर भी जोर दिया गया। किसानों को स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर एकीकृत जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे लागत घटे और दीर्घकालिक कृषि स्थिरता सुनिश्चित हो सके।

ICAR-CCARI, Goa Organises Awareness Programme on the Importance of Organic Nutrient Sources in Sustainable Agriculture

यह कार्यक्रम कृषि विभाग, आत्मा उत्तर गोवा, गोवा डेयरी तथा पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में कुल 34 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 29 पुरुष तथा 5 महिलाएं शामिल थीं।

(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान, गोवा)

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