केन्द्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बजट-पूर्व बैठकों की श्रृंखला में भारतीय कृषि के समग्र विकास को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों से किया संवाद

केन्द्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बजट-पूर्व बैठकों की श्रृंखला में भारतीय कृषि के समग्र विकास को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों से किया संवाद

8 जनवरी, 2026, नई दिल्ली

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में आज प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और बहुपक्षीय विकास साझेदारों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। श्री चौहान बजट पूर्व लगातार बैठकें कर कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों से सीधा संवाद कर रहे हैं।

 

बैठक में फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (FAO), वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP), इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट (IFAD), वर्ल्ड बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB), डॉइचे गेज़ेलशाफ्ट फ़्यूर इंटर्नैशियोनाले ज़ुसामेनआर्बाइट (GIZ) और जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के प्रतिनिधि सहित विभिन्न संस्थानों के पदाधिकारी शामिल हुए।

भारत की समृद्ध कृषि यात्राः बैठक में केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की कृषि यात्रा खाद्य-अभाव से वैश्विक खाद्य आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बनने तक पहुंची है और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में आज देश कई प्रमुख कृषि उत्पादों का निर्यातक बन चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद अब पोषण सुरक्षा और सतत आजीविका को अपनी प्राथमिकता बनाया है।

डिजिटल एग्रीकल्चर, कृषि नीति का मजबूत स्तंभः श्री चौहान ने कहा कि डिजिटल एग्रीकल्चर भारत की कृषि नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और मंत्रालय इस दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई–नाम (e-NAM), डिजिटल फसल आकलन एवं टेक्नोलॉजी आधारित सेवाओं के माध्यम से कृषि को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और किसान-केन्द्रित बनाया जा रहा है।

जल संरक्षण, “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” की दिशा में ठोस कदमः केन्द्रीय कृषि मंत्री ने “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार जल संरक्षण एवं जल के अधिकतम उपयोग के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि माइक्रो-इरिगेशन, सिंचाई दक्षता बढ़ाने और जल-संरक्षण तकनीकों को अपनाने से किसानों की लागत घटेगी तथा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

   

पोषण आधारित खेती तथा फसल विविधीकरण की दिशा में योजनाबद्ध कार्यः श्री चौहान ने बताया कि मंत्रालय पोषण आधारित खेती, मांग आधारित कृषि उत्पादन एवं क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं और परियोजनाएं पहले से ही संचालित कर रहा है। उन्होंने कहा कि इन पहलों से किसानों की आय बढ़ाने के साथ–साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।

वैश्विक अनुभवों से सीख, भारत का मॉडल दुनिया के लिए उदाहरणः केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भारत कृषि क्षेत्र में अपने सफल अनुभवों और बेस्ट प्रैक्टिसेज को अन्य देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है, साथ ही वैश्विक नवाचारों से सीख कर उन्हें भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संवाद परस्पर लाभकारी सहयोग, ज्ञान-साझेदारी और दीर्घकालिक नीति निर्माण के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, निजी क्षेत्र और किसानों के सामूहिक प्रयास से भारतीय कृषि को अधिक उत्पादक, टिकाऊ, प्रौद्योगिकी–समर्थ और किसान–हितैषी बनाने का लक्ष्य पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

किसानों की आय व उत्पादकता बढ़ाने और नवाचार पर चर्चाः बैठक में संस्थानों के प्रतिनिधियों ने किसानों की आय और बढ़ाने, फसल उत्पादकता में सुधार, आधुनिक तकनीकों के उपयोग तथा कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने सहित विभिन्न सुझाव प्रस्तुत किया। चर्चा के प्रमुख बिंदु- छोटे किसानों के लिए बेहतर मार्केट एक्सेस और मूल्य संवर्धन, युवा एवं महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स तथा उन्नत क्रॉप मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से फसलों की रीयल-टाइम निगरानी एवं जोखिम प्रबंधन के साथ-साथ ही हाई वैल्यू क्रॉप्स, ऑर्गेनिक और प्राकृतिक खेती, पर जोर दिया गया।

बैठक में हाई वैल्यू क्रॉप्स, ऑर्गेनिक फार्मिंग, प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने कहा कि सही नीतिगत समर्थन और तकनीकी सहयोग से इन क्षेत्रों में किसानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं और कृषि को अधिक लाभकारी तथा पर्यावरण–अनुकूल बनाया जा सकता है।

बैठक में डॉ. देवेश चतुर्वेदी, केन्द्रीय कृषि सचिव, डॉ. मांगीलाल जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप), सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

(स्रोतः कृषि भवन, नई दिल्ली)

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