25 अप्रैल, 2026, लखनऊ
डॉ. एम.एल. जाट, माननीय सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, भाकृअनुप, द्वारा भाकृअनुप-राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीएफजीआर) का दौरा किया गया।

उन्होंने जलीय आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण, विकास एवं प्रबंधन के लिए किए जा रहे प्रयासों, गतिविधियों एवं उपलब्धियों की सराहना की। उनके साथ डॉ. जे.के. जेना, उपमहानिदेशक (मात्स्यिकी), भाकृअनुप; डॉ. दिनेश सिंह, निदेशक, भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान; तथा डॉ. टी. दामोदरन, निदेशक, केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी अनुसंधान संस्थान, भी मौजूद थेI

डॉ. एम.एल. जाट ने अपने संबोधन में कहा कि जलीय जैवविविधता संरक्षण तथा आनुवंशिक संसाधनों के समुचित प्रबंधन के माध्यम से अपनी पूरी क्षमता का विकास करना हमारा लक्ष्य है। साथ ही उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग द्वारा मछुवा समुदाय एवं मत्स्य पालन से जुड़े किसानों की खुशहाली के लिए अनवरत रूप से कार्य करना हमारा परम ध्येय भी हैI कार्यक्रम के दौरान डॉ. जाट ने संस्थान के कार्मिकों के साथ संवाद सत्र में भाग लियाI
महानिदेशक ने कहा कि मानव जीवन में सेवा का अवसर दुर्लभ है, और भाकृअनुप के कर्मी सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें अन्नदाताओं की सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ हैI उन्होंने वैज्ञानिकों से उत्तम अनुसंधान द्वारा मात्स्यिकी क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने व रोजगार सृजन के माध्यम से आजीविका उन्नयन करने के साथ-साथ समाज में आर्थिक समपन्नता लाने की दिशा में निरंतर संलग्न रहने का आह्वान भी कियाI

डॉ. काजल चक्रबर्ती, निदेशक, एनबीएफजीआर, द्वारा अतिथियों के स्वागत के साथ उन्हें संस्थान की गतिविधियों एवं उपलब्धियों से अवगत कराया गया।
(स्रोतः भाकृअनुप-राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो, लखनऊ)







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