16 अक्टूबर, 2026, सिंधुदुर्ग, महाराष्ट्र
सिंधुदुर्ग जिले के गार्डियन मंत्री एवं महाराष्ट्र सरकार के मत्स्य पालन मंत्री श्री नितेश राणे ने आज सिंधुदुर्ग जिले के वेंगुर्ला तालुका के उभादांडा में एक बहु-प्रजाति हैचरी की आधारशिला रखी।
₹22.24 करोड़ के निवेश से स्थापित की जा रही इस हैचरी का उद्देश्य टिकाऊ खारे पानी की जलीय कृषि को मजबूत करना और पूरे कोंकण क्षेत्र में उच्च मूल्य वाली जलीय प्रजातियों के गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
इस परियोजना को महाराष्ट्र सरकार के मैंग्रोव सेल का सहयोग प्राप्त है, जबकि एशियन सीबास के लिए भाकृअनुप-केन्द्रीय खारा जल जीवपालन संस्थान, चेन्नई; बाइवॉल्व्स के लिए भाकृअनुप-केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान; और मड क्रैब्स के लिए राजीव गांधी सेंटर फॉर एक्वाकल्चर (आरजीसीए) तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं। यह सुविधा एशियन सीबास, मड क्रैब्स, ऑयस्टर्स और मसल्स के बीज उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करेगी, जिससे जलीय कृषि विकास को समर्थन मिलेगा, रोजगार सृजित होंगे और मछुआरों, महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और युवा उद्यमियों के लिए आजीविका के अवसर पैदा होंगे।

भाकृअनुप-सीआईबीए राज्य में खारे पानी की जलीय कृषि को बढ़ावा देने के लिए महाराष्ट्र सरकार के साथ सहयोग कर रहा है। इसकी पहलों में संस्थान की रिस्पॉन्सिबल एक्वाकल्चर जोन प्लानिंग विधियों का उपयोग करके संभावित जलीय कृषि क्षेत्रों की पहचान करना और एशियन सीबास केज एक्वाकल्चर के माध्यम से सिंधुदुर्ग जिले में मछुआरा परिवारों के लिए आजीविका विकास मॉडल का प्रदर्शन करना शामिल है। ये पहल टिकाऊ जलीय कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए तकनीकी सहायता, क्षमता विकास और आवश्यक इनपुट के प्रावधान को एकीकृत करती हैं। भाकृअनुप-सीआईबीए ने प्रस्तावित बहु-प्रजाति सुविधा के सीबास हैचरी घटक के डिजाइन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी तैयार की है और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया है।
सभा को संबोधित करते हुए श्री नितेश राणे ने रेखांकित किया कि हैचरी सीबास, मड क्रैब्स और बाइवॉल्व्स के गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी, जिससे टिकाऊ जलीय कृषि को बढ़ावा मिलेगा और पूरे कोंकण क्षेत्र में मछुआरा समुदायों, महिला एसएचजी और युवा उद्यमियों के लिए आजीविका तथा रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
महाराष्ट्र सरकार के मत्स्य आयुक्त श्री भानुदास पालवे, आईएएस, ने समुद्री मत्स्य पालन और खारे पानी की जलीय कृषि के लिए परियोजना के महत्व को रेखांकित किया और हैचरी को समय पर पूरा करने का आश्वासन दिया। महाराष्ट्र सरकार के अतिरिक्त मत्स्य आयुक्त श्री महेश देओरे ने वैज्ञानिक बीज उत्पादन और जैव-सुरक्षित जलीय कृषि पद्धतियों के माध्यम से स्थानीय आजीविका को मजबूत करने की इस सुविधा की क्षमता पर प्रकाश डाला। दक्षिण कोंकण क्षेत्र की संभागीय वन अधिकारी श्रीमती कंचन पवार ने पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करते हुए मत्स्य विकास को आगे बढ़ाने में अंतर-विभागीय समन्वय के महत्व पर जोर दिया।

भाकृअनुप-सीआईबीए के नवसारी क्षेत्रीय केन्द्र के वैज्ञानिक ने टिकाऊ जलीय कृषि के लिए महाराष्ट्र के खारे पानी के संसाधनों का उपयोग करने में बहु-प्रजाति हैचरी के महत्व पर प्रकाश डाला, विशेष रूप से मछुआरा परिवारों की आजीविका में सुधार के लिए उच्च मूल्य वाले एशियन सीबास केज फार्मिंग पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि कर्नाटक में इस तरह की पहली हैचरी की स्थापना के बाद, भाकृअनुप-सीआईबीए के परामर्श सहयोग से पश्चिमी तट पर स्थापित होने वाली यह दूसरी सीबास हैचरी होगी।
महाराष्ट्र सरकार के सहायक मत्स्य आयुक्त श्री सागर कुवासेकर ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
बहु-प्रजाति हैचरी की स्थापना महाराष्ट्र में जलीय कृषि अवसंरचना को मजबूत करने, गुणवत्तापूर्ण बीज तक पहुंच में सुधार करने और कोंकण तट पर आजीविका के बेहतर अवसरों के लिए टिकाऊ, विज्ञान-आधारित जलीय कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
(स्रोत: भाकृअनुप-केन्द्रीय खारा जल जीवपालन संस्थान, चेन्नई)








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