ओडिशा के ढेंकनाल जिले के ढेंकानाल सदर तथा ओडापाड़ा ब्लॉकों के दो ग्राम समूहों में जल संचयन आधारित समेकित कृषि प्रणाली (आईएफएस) के हस्तक्षेप लागू किया गया। किसानों की भागीदारी के आधार पर उनके खेतों में कुल 10 जल संचयन संरचनाएं (डब्ल्यूएचएस) निर्मित की गईं। इन संरचनाओं में संग्रहित जल का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया गया, जैसे—कृषि, मत्स्य पालन, बांध (डाइक) के किनारे बागवानी, सब्जी उत्पादन, पोल्ट्री, डेयरी तथा मशरूम उत्पादन। इस प्रकार समेकित कृषि प्रणाली (आईएफएस) के मॉडल विकसित किए गए। इन आईएफएस इकाइयों में भूमि का विभाजन तालाब क्षेत्र, मेड़/बांध क्षेत्र, ऊपरी भूमि तथा धान की खेती वाले क्षेत्र के रूप में किया गया।

समेकित कृषि प्रणाली से शुद्ध आय प्रति हैक्टर ₹16,100 से ₹2,51,000 तक पाई गई। ऊपरी भूमि में पोल्ट्री पालन और तालाब के किनारों पर गहन खेती को आईएफएस मॉडल में शुद्ध आय बढ़ाने के लिए प्रभावी पाया गया। विभिन्न आईएफएस मॉडलों में प्रति हैक्टर आय में अंतर इस बात को दर्शाता है कि सफल मॉडल बनाने में किसान की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

तकनीक अपनाने से पहले और बाद में किसानों की भौतिक, सामाजिक, वित्तीय, मानव एवं प्राकृतिक संपत्तियों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया। इन पांच प्रकार की संपत्तियों से संबंधित मानकों को किसानों के साक्षात्कार के दौरान 5-बिंदु पैमाने (न्यूनतम 1 और अधिकतम 5) पर मापा गया। तकनीक अपनाने के बाद किसानों के जीवन स्तर में समग्र सुधार देखा गया। प्राकृतिक संपत्तियों में अधिकतम 70% की वृद्धि दर्ज की गई, इसके बाद भौतिक संपत्तियों में 24% की वृद्धि हुई। सामाजिक तथा वित्तीय संपत्तियों में 17–21% तक की वृद्धि पाई गई। समग्र जीवन स्तर का सूचकांक 5 से 25 के पैमाने पर 13.5 से बढ़कर 17.1 हो गया।
(स्रोत: भाकृअनुप–भारतीय जल प्रबंधन संस्थान, भुवनेश्वर)







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