19 जून, 2026, निकोबार द्वीपसमूह
राष्ट्रीय स्तर के खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत, कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), निकोबार, जो भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजय पुरम के अधीन है, ने कृषि विभाग के सहयोग से मुनाक गांव, नानकौरी में "मृदा उर्वरता सुधार के लिए हरी पत्ती खाद के महत्व और उपयोग" पर एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसी प्रकार का एक कार्यक्रम ग्रेट निकोबार के कैंपबेल बे में भी आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य किसानों के बीच सतत मृदा उर्वरता प्रबंधन को बढ़ावा देना था।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य मृदा उर्वरता बढ़ाने, मृदा में जैविक पदार्थ की मात्रा सुधारने, लाभकारी सूक्ष्मजीव गतिविधि को प्रोत्साहित करने, नमी धारण क्षमता बढ़ाने तथा दीर्घकालिक कृषि स्थिरता सुनिश्चित करने में हरी पत्ती खाद की भूमिका के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था। तकनीकी सत्र के दौरान, आईसीएआर-केवीके निकोबार के विषय वस्तु विशेषज्ञ (एसएमएस) ने कृषि प्रणालियों में हरी पत्ती खाद के उपयोग के लाभों को समझाया और मृदा संरचना में सुधार, पोषक तत्व उपलब्धता में वृद्धि तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में इसके योगदान पर प्रकाश डाला।

किसानों को स्थानीय रूप से उपलब्ध हरी पत्ती संसाधनों तथा बेहतर फसल वृद्धि और अधिक उत्पादकता प्राप्त करने हेतु उनके उपयुक्त उपयोग के तरीकों से भी परिचित कराया गया। इसके पश्चात एक संवादात्मक चर्चा हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने क्षेत्रीय अनुभव साझा किए तथा मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और जैविक खेती पद्धतियों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। विशेषज्ञों ने निकोबार द्वीपसमूह की स्थानीय कृषि-पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुरूप व्यावहारिक सुझाव प्रदान करते हुए उनके प्रश्नों का समाधान किया।
भाग लेने वाले किसानों ने इस पहल की सराहना की तथा मृदा स्वास्थ्य सुधार, फसल उत्पादकता वृद्धि और पर्यावरण-अनुकूल सतत कृषि को बढ़ावा देने के लिए हरी पत्ती खाद पद्धतियों को अपनाने की अपनी इच्छा व्यक्त की।
यह कार्यक्रम भाकृअनुप-सीआईएआरआई, श्री विजय पुरम के निदेशक डॉ. जय सुंदर के समन्वय में आयोजित किया गया, जो खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत निकोबार द्वीपसमूह में किसानों के ज्ञान और पर्यावरण-अनुकूल मृदा प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने को निरंतर सुदृढ़ कर रहा है।
इस जागरूकता कार्यक्रम में कुल 30 किसानों और कृषक महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजय पुरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह)







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