17 जून, 2026, मोतिहारी
राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियान–2026 के अंतर्गत, भाकृअनुप–महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी ने बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के कोटवा प्रखंड के कररिया गांव में किसान जागरूकता एवं आदान वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में सतत एवं जलवायु-लचीली कृषि को बढ़ावा देने के लिए अनुसूचित जाति उप-योजना (एससीएसपी) के अंतर्गत आदान सहायता के साथ मृदा स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों को एकीकृत किया गया।
कार्यक्रम में जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा की गई, उनमें सेसबानिया (ढैंचा) के माध्यम से हरी खाद, फसल विविधीकरण, संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन तथा मृदा स्वास्थ्य और कृषि उत्पादकता में सुधार के लिए एकीकृत कृषि प्रणालियां शामिल थीं।
तकनीकी सत्र के दौरान वैज्ञानिकों ने मृदा में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाने, मृदा की जैविक गतिविधियों में सुधार करने तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में हरी खाद की भूमिका की व्याख्या की। किसानों को धान की रोपाई से पहले ढैंचा की खेती करने और पोषक तत्वों की उपलब्धता तथा मृदा उर्वरता बढ़ाने के लिए उसके जैविक द्रव्यमान को मिट्टी में मिलाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए खेत बचाओ अभियान के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला गया, जिसमें मृदा स्वास्थ्य की पुनर्बहाली और कृषि रसायनों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए जैव उर्वरकों, जैव कीटनाशकों, जैविक खाद तथा एकीकृत कृषि प्रणाली दृष्टिकोणों के महत्व पर विशेष बल दिया गया। इस बात पर जोर दिया गया कि स्वस्थ भोजन की उत्पत्ति स्वस्थ मिट्टी से होती है और किसानों को दीर्घकालिक उत्पादकता एवं लाभप्रदता के लिए सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना करने और कृषि प्रणाली की लचीलापन बढ़ाने में फसल विविधीकरण तथा संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के महत्व पर भी चर्चा की गई। किसानों को मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक अनुशंसाओं को अपनाने और उर्वरक उपयोग दक्षता तथा फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए पोषक तत्वों के उचित अनुप्रयोग कार्यक्रमों का पालन करने की सलाह दी गई।
आगामी धान की फसल के लिए हरी खाद के रूप में ग्रीष्मकालीन जैव द्रव्यमान फसलों, जैसे सेसबानिया, के उपयोग के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। यह बताया गया कि हरी खाद पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में सुधार करती है, मृदा कार्बनिक कार्बन को बढ़ाती है, लाभकारी सूक्ष्मजीवी गतिविधियों को प्रोत्साहित करती है और आगामी फसलों में उर्वरकों की आवश्यकता को कम करने में मदद करती है।
एससीएसपी घटक के अंतर्गत एक आदान वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसके दौरान भाग लेने वाले किसानों को उन्नत फसल प्रबंधन पद्धतियों को समर्थन देने के लिए 5 किलोग्राम धान बीज (राजेंद्र मसूरी/एमटीयू-7029) के साथ आवश्यक कृषि उपकरण, जिनमें फावड़ा, खुरपी और हंसिया शामिल हैं, वितरित किए गए।
किसानों ने हरी खाद, मृदा परीक्षण, फसल विविधीकरण और संतुलित उर्वरक उपयोग पर वैज्ञानिक मार्गदर्शन की सराहना की। अनेक प्रतिभागियों ने मृदा स्वास्थ्य पर असंतुलित उर्वरक उपयोग के प्रतिकूल प्रभावों को स्वीकार किया और आगामी फसल मौसम में अनुशंसित पद्धतियों को अपनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का समापन इस सशक्त संदेश के साथ हुआ कि स्वस्थ मिट्टी सतत कृषि, पोषण सुरक्षा और समृद्ध कृषि समुदायों की आधारशिला है, जिससे खेत बचाओ अभियान–2026 और एससीएसपी पहल दोनों के उद्देश्यों को और मजबूती मिली।
इस कार्यक्रम ने प्रदर्शित किया कि आदान सहायता को वैज्ञानिक जागरूकता के साथ जोड़ने से सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने में तेजी लाई जा सकती है और किसानों की मृदा स्वास्थ्य के प्रभावी प्रबंधन की क्षमता को सुदृढ़ किया जा सकता है।
कार्यक्रम में कुल 60 किसानों, जिनमें 40 महिलाएं और 20 पुरुष शामिल थे, ने भाग लिया।
(स्रोत: भाकृअनुप–महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान, मोतिहारी, बिहार)







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