17 जून, 2026, कार निकोबार
भाकृअनुप द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियान और चल रहे स्पाइस प्रवाह 2.0 अभियान के अंतर्गत, भाकृअनुप–कृषि विज्ञान केन्द्र, भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह ने कृषि विभाग, कार निकोबार के सहयोग से बिग लापाथी गांव में सतत कृषि और वर्मीकम्पोस्टिंग पर एक जागरूकता-सह-प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य सतत कृषि पद्धतियों, जैविक पोषक तत्व प्रबंधन, वर्मीकम्पोस्टिंग, मृदा स्वास्थ्य सुधार तथा मसाला फसलों की खेती को बढ़ावा देकर कृषि उत्पादकता और किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करना था।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्री अमित काले, आईएएस, उपस्थित रहे। कार निकोबार की जनजातीय परिषद (सीटीसी) के अध्यक्ष श्री लियोनेल निकोमेड विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि बिग लापाथी गांव के प्रथम कप्तान श्री मनुआह थॉमस ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और किसानों को वैज्ञानिक खेती पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए विशेषज्ञों ने सतत कृषि में वर्मीकम्पोस्टिंग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्मीकम्पोस्ट मृदा उर्वरता को बढ़ाता है, पोषक तत्वों की उपलब्धता में सुधार करता है, मृदा कार्बनिक कार्बन को बढ़ाता है, लाभकारी सूक्ष्मजीवी गतिविधियों को प्रोत्साहित करता है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम करता है। उन्होंने किसानों को खेत बचाओ अभियान के तहत दीर्घकालिक मृदा स्वास्थ्य सुधार के लिए स्थानीय रूप से उपलब्ध जैविक अवशेषों और कृषि अपशिष्ट का उपयोग करके गुणवत्तापूर्ण वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने के लिए भी प्रेरित किया।
प्रदर्शन के अंतर्गत बिग लापाथी गांव में तीन एचडीपीई वर्मीबेड वितरित और स्थापित किए गए, जिनमें से एक प्रगतिशील किसान श्रीमती एस्टर के खेत में स्थापित किया गया। किसानों को वर्मीबेड स्थापना, केंचुआ प्रबंधन, नमी नियंत्रण, उपयुक्त खाद्य सामग्री तथा गुणवत्तापूर्ण वर्मीकम्पोस्ट की कटाई पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस जीवंत प्रदर्शन ने प्रतिभागियों में विशेष रुचि उत्पन्न की और उन्हें अपने खेतों में वर्मीकम्पोस्टिंग इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।
सभा को संबोधित करते हुए श्री अमित काले ने निकोबार जिले में खेत बचाओ अभियान और स्पाइस प्रवाह 2.0 के सफल क्रियान्वयन के लिए भाकृअनुप–केवीके निकोबार और कृषि विभाग के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य सुधारने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए वैज्ञानिक और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ प्रौद्योगिकियों को अपनाने के महत्व पर बल दिया।
श्री लियोनेल निकोमेड ने निकोबार द्वीपसमूह में दीर्घकालिक कृषि विकास सुनिश्चित करने के लिए मृदा संरक्षण और सतत कृषि के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कृषि समुदाय के लाभ के लिए भाकृअनुप–केवीके और कृषि विभाग द्वारा किए जा रहे तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण प्रयासों की प्रशंसा की।

श्री मनुआह थॉमस ने इस पहल का स्वागत किया और किसानों को विकासात्मक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेने तथा वर्मीकम्पोस्टिंग और जैविक पोषक तत्व प्रबंधन जैसी अनुशंसित प्रौद्योगिकियों को अपनाकर सतत कृषि विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, अधिकारियों और किसानों के बीच वर्मीकम्पोस्टिंग, मृदा उर्वरता प्रबंधन, जैविक खेती, मसाला फसल उत्पादन और सतत कृषि पद्धतियों पर संवादात्मक चर्चा आयोजित की गई। किसानों ने कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित प्रौद्योगिकियों को अपनाने की अपनी इच्छा व्यक्त की।
कार्यक्रम में कुल 35 किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम का समापन मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, ग्राम प्रतिनिधियों, भाग लेने वाले किसानों, कृषि विभाग के अधिकारियों तथा आईसीएआर–केवीके टीम को उनके बहुमूल्य सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
यह कार्यक्रम डॉ. जय सुंदर, निदेशक, भाकृअनुप–सीआईएआरआई, श्री विजय पुरम, के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जो निकोबार जिले में सतत कृषि पद्धतियों को सुदृढ़ करने और कृषि समुदायों की आजीविका में सुधार लाने के लिए संस्थान के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।
(स्रोत: भाकृअनुप–केन्द्रीय द्वीप कृषि अनुसंधान संस्थान, श्री विजय पुरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह)







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