कृषि अभियांत्रिकी प्रभाग को कृषि अभियांत्रिकी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) कार्यक्रमों की योजना बनाने, समन्वय करने तथा उनकी निगरानी करने और सूचना भंडार के रूप में कार्य करने का दायित्व सौंपा गया है। यह प्रभाग कृषि में उत्पादन एवं उत्पादनोत्तर गतिविधियों के मशीनीकरण को आगे बढ़ाने हेतु प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान, विकास एवं प्रदर्शन के लिए समर्पित है।यह कार्य पारंपरिक एवं अपारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग के साथ-साथ सिंचाई एवं जलनिकास के मशीनीकरण; कृषि उत्पादों एवं उप-उत्पादों के कटाई-उपरांत प्रबंधन तथा मूल्यवर्धन पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए किया जाता है। इस प्रभाग के अधिकार क्षेत्र में सात संस्थान, दो क्षेत्रीय केंद्र, एक जिनिंग प्रशिक्षण केंद्र, छह अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाएँ (AICRP), दो अखिल भारतीय नेटवर्क परियोजनाएँ (AINP) तथा चार कंसोर्टिया अनुसंधान मंच परियोजनाएँ (CRP) शामिल हैं।
विज़न
कृषि यंत्रीकरण, मूल्यवर्धन और ऊर्जा प्रबंधन जैसे इंजीनियरिंग उपायों को उत्पादन और फसल कटाई के बाद की सभी प्रक्रियाओं में लागू करके भारतीय कृषि को एक टिकाऊ, लाभदायक और प्रतिस्पर्धी उद्यम में बदलना।
मिशन
कृषि में सतत् और बेहतर उत्पादकता के साथ-साथ लाभप्रदता प्राप्त करने के लिए विभिन्न कृषि प्रणालियों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने वाली क्षेत्र-विशिष्ट इंजीनियरिंग प्रौद्योगिकियों को विकसित करना और उन्हें लागू करना।
अधिदेश
कृषि अभियांत्रिकी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) कार्यक्रमों की योजना बनाना, उनका समन्वय और निगरानी करना तथा इस क्षेत्र में एक विश्वसनीय सूचना स्रोत के रूप में कार्य करना।







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